हाल के दिनों में H1B वीज़ा कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बदलाव और प्रस्तावित सुधार देखने को मिले हैं, जिनका भारतीय IT प्रोफेशनल्स, स्टार्टअप्स और बड़ी IT कंपनियों पर गहरा असर पड़ सकता है। ये परिवर्तन वीज़ा प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना सकते हैं, साथ ही अमेरिका में काम करने की चाह रखने वाले कुशल भारतीय श्रमिकों के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर सकते हैं।
अमेरिकी H1B वीज़ा कार्यक्रम में आने वाले समय में कई बड़े बदलावों की उम्मीद है। “प्रोजेक्ट 2025” और “वीज़ा रिफॉर्म एक्ट ऑफ 2025” जैसे प्रस्तावों के तहत वीज़ा की संख्या में भारी कमी, सैलरी की न्यूनतम सीमा में वृद्धि, और कंपनियों पर सख्त निगरानी जैसे प्रावधान शामिल हैं। इसके साथ ही, वीज़ा आवंटन की प्रक्रिया को लॉटरी सिस्टम से हटाकर वेतन-आधारित प्रणाली में बदलने का भी प्रस्ताव है, जिससे उच्च वेतन वाली भूमिकाओं को प्राथमिकता मिल सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बदलावों में से एक है नई H1B वीज़ा याचिका पर $100,000 का भारी शुल्क, जिसे 21 सितंबर, 2025 से प्रभावी किया गया है। इस शुल्क का सीधा असर TCS, Infosys और Cognizant जैसी भारतीय IT दिग्गज कंपनियों पर पड़ेगा, जो अमेरिका में नए कर्मचारियों को भेजने की लागत पर फिर से विचार करने को मजबूर होंगी। अनुमान है कि इस शुल्क से इन कंपनियों की अर्निंग्स पर लगभग 6% का असर हो सकता है।
भारतीय आवेदकों के लिए एक और बड़ी चिंता का विषय H1B वीज़ा इंटरव्यू में हो रही देरी है, जो अब 2026 तक बढ़ गई है। अमेरिकी विदेश विभाग के नए वीटिंग नियमों, जिसमें सोशल मीडिया की समीक्षा भी शामिल है, के कारण ये देरी हो रही है। इससे उन भारतीय पेशेवरों के लिए अनिश्चितता का माहौल बन गया है जो अमेरिका में नौकरी शुरू करने का इंतजार कर रहे हैं या छुट्टी पर भारत आए हुए हैं। कई मामलों में, इन देरी के कारण अमेरिकी नौकरी की शुरुआती तारीखें टल सकती हैं, और कुछ पेशेवरों को अपनी नौकरी खोने का भी डर है।
हालांकि, H1B मॉडर्नाइजेशन रूल, जो 17 जनवरी, 2025 से प्रभावी हुआ है, वीज़ा अनुमोदन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने और कंपनियों को प्रतिभाशाली कर्मचारियों को बनाए रखने में अधिक लचीलापन प्रदान करने का लक्ष्य रखता है। यह F-1 छात्रों को H1B स्टेटस में आसानी से बदलने में भी मदद करेगा। वहीं, H1B लॉटरी पंजीकरण शुल्क $10 से बढ़कर $215 हो गया है, और अब “लाभार्थी-केंद्रित” चयन प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जिसमें कर्मचारी को केवल एक ही बार लॉटरी जीतने का अवसर मिलता है, भले ही कितने भी नियोक्ता उसे पंजीकृत करें।
अमेरिकी आईटी सेक्टर में भारतीय पेशेवरों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। हाल ही में, एक अमेरिकी पोलस्टर ने “सिलिकॉन वैली के इंडिफिकेशन” का आरोप लगाते हुए भारतीय टेक वर्कर्स को निशाना बनाया, जिससे H1B कार्यक्रम को लेकर बहस और गरमा गई है। इन सभी परिवर्तनों के बीच, भारतीय IT कंपनियां अपनी ऑफशोरिंग रणनीतियों को मजबूत कर रही हैं और स्थानीय स्तर पर हायरिंग बढ़ा रही हैं ताकि H1B वीज़ा पर निर्भरता कम हो सके।
KEY POINTS:
– नई H1B वीज़ा याचिका पर $100,000 का शुल्क 21 सितंबर, 2025 से प्रभावी हो गया है।
– H1B वीज़ा इंटरव्यू में देरी 2026 तक बढ़ गई है, जिससे भारतीय आवेदकों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
– “प्रोजेक्ट 2025” और “वीज़ा रिफॉर्म एक्ट ऑफ 2025” के तहत वीज़ा संख्या में कमी और वेतन-आधारित आवंटन जैसे बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं।
– भारतीय IT कंपनियों जैसे TCS और Infosys पर नए शुल्क का महत्वपूर्ण वित्तीय प्रभाव पड़ेगा, जिससे वे अपनी हायरिंग और ऑफशोरिंग रणनीतियों पर पुनर्विचार कर रही हैं।
– H1B मॉडर्नाइजेशन रूल 17 जनवरी, 2025 से प्रभावी है, जिसका उद्देश्य प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और F-1 छात्रों के लिए लचीलापन बढ़ाना है।
H1B वीज़ा में बड़े बदलाव: भारतीय IT प्रोफेशनल्स और कंपनियों पर क्या होगा असर?
By Ganesh Thik
On: December 16, 2025 9:03 AM
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