क्या आपको भी रात में ये डर सताता है कि AI आपकी कोडिंग जॉब खा जाएगा? अगर हाँ, तो Zoho Corp के फाउंडर और चीफ साइंटिस्ट Sridhar Vembu का यह नया बयान आपको गहरी राहत की सांस देगा। पिछले साल तक जो वेम्बु कह रहे थे कि AI कोडिंग का काम संभाल लेगा, अब उन्होंने अपनी राय पूरी तरह बदल दी है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि टेक जगत के इस दिग्गज को कहना पड़ा—”इंसानी दिमाग की जगह कोई नहीं ले सकता”?
शुक्रवार को Zoho के एक इंटरनल टाउनहॉल में Sridhar Vembu ने अपनी कंपनी के इंजीनियर्स के सामने एक बहुत ही प्रैक्टिकल बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि Artificial Intelligence (AI) कोडिंग के लिए एक बेहतरीन टूल जरूर है, लेकिन यह सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स को रिप्लेस नहीं कर सकता।
वेम्बु ने इसे “Orchestration” (तालमेल) का नाम दिया। उनके मुताबिक, AI कोड जनरेट कर सकता है, लेकिन उस कोड को सही दिशा देना, उसे रिफाइन करना और जहां AI अटक जाए वहां उसे गाइड करना—यह काम एक इंसानी इंजीनियर ही कर सकता है।
Claude Opus 4.5 का Reality Check
इस बदले हुए नजरिए के पीछे एक ठोस वजह है। वेम्बु ने X (ट्विटर) पर खुलासा किया कि Zoho के इंजीनियर्स ने हाल ही में Anthropic के Claude Opus 4.5 मॉडल द्वारा लिखे गए C++ कोड का रिव्यू किया। नतीजे चौंकाने वाले थे:
- Simplicity vs Complexity: AI ने जो कोड लिखा, वह ज्यादातर साधारण (Simple) था। मुश्किल और पेचीदा लॉजिक में AI का योगदान बहुत कम था।
- Needlessly Verbose: AI ने कोड को बेवजह लंबा खींच दिया था (Verbose), जिसे कम शब्दों में बेहतर लिखा जा सकता था।
- Pattern Recall: AI उन कोड्स को याद रखने में माहिर है जो ओपन-सोर्स में पहले से मौजूद हैं, लेकिन नया सोचने में यह अभी भी पीछे है।
वेम्बु ने माना कि AI “Glue Code” लिखने (सिस्टम्स को जोड़ने वाला कोड), API हैंडल करने और डेटा मूव करने में उस्ताद है, क्योंकि ये काम इंसानों के लिए बोरिंग होते हैं। लेकिन जहां “Deep Reasoning” और अनुभव की बात आती है, वहां AI अभी भी जूनियर है।
इसका क्या असर होगा? (Expert Insight):
Sridhar Vembu का यह बयान भारतीय IT सेक्टर के लिए एक बड़ा Reality Check है। अभी तक मार्केट में डर का माहौल था कि “Devin” या “Claude” जैसे टूल्स सब कुछ खत्म कर देंगे। लेकिन वेम्बु का यह एनालिसिस बताता है कि जॉब्स खत्म नहीं हो रहीं, बल्कि Evolve हो रही हैं।
फ्यूचर में ‘Code Writing’ से ज्यादा फोकस ‘Code Reviewing’ और ‘AI Management’ पर होगा। यानी, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अब सिर्फ कोडर नहीं, बल्कि एक ‘आर्किटेक्ट’ होगा जो AI रूपी मजदूरों से काम करवाएगा।
हालांकि, वेम्बु ने “Hallucinations” (गलत जानकारी देना) के रिस्क पर भी जोर दिया है। इसका मतलब साफ है—अगर आप जूनियर डेवलपर हैं और सिर्फ बेसिक कोड कॉपी-पेस्ट करना जानते हैं, तो खतरा है। लेकिन अगर आप लॉजिक और सिस्टम डिजाइन समझते हैं, तो AI आपका कुछ नहीं बिगाड़ सकता, बल्कि आपकी प्रोडक्टिविटी को 10 गुना बढ़ा देगा।
आज की बड़ी बातें:
- Human Judgement is King: AI सिर्फ एक असिस्टेंट है, असली “मास्टरमाइंड” इंजीनियर ही रहेगा जो आउटपुट को ‘Orchestrate’ करेगा।
- Quality Concerns: AI द्वारा लिखा गया कोड अक्सर जरूरत से ज्यादा लंबा (Verbose) होता है, जिसे इंसानी दखल के बिना फाइनल नहीं किया जा सकता।
- Best Use Case: बोरिंग काम जैसे API इंटीग्रेशन और Glue Code लिखने के लिए AI बेस्ट है, लेकिन कॉम्प्लेक्स प्रॉब्लम सॉल्विंग के लिए नहीं।
- Opinion Shift: पिछले साल वेम्बु को लगता था कि AI कोडिंग टेकओवर कर लेगा, लेकिन C++ कोड के रिव्यू के बाद अब तस्वीर साफ हो गई है।
सूचना के लिए Zoho Corp के आधिकारिक बयानों और विभिन्न प्रतिष्ठित टेक न्यूज़ सोर्सेस की मदद ली गई है।





