ई-कॉमर्स दिग्गज Amazon एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार कारण कोई नई सेल नहीं, बल्कि 16,000 कर्मचारियों की छंटनी (Massive Layoffs) की कड़वी हकीकत है। ताज़ा रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी एक बड़े पुनर्गठन (Restructuring) की तैयारी कर रही है। यह खबर केवल एक कॉर्पोरेट फैसला नहीं है, बल्कि उस बड़े बदलाव का बिगुल है जहां AI Automation को इंसानी वर्कफोर्स पर तरजीह दी जा रही है।
Amazon में छंटनी: 16,000 का आंकड़ा और ‘The Ripple Effect’
हालांकि Amazon ने आधिकारिक तौर पर इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है, लेकिन इंटरनल सोर्स और मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि यह छंटनी ग्लोबल लेवल पर होगी।
इस छंटनी का सबसे ज्यादा असर इन तीन वर्टिकल पर पड़ने वाला है:
- Retail Division: ऑटोमेटेड वेयरहाउस और रोबोटिक्स के आने से फिजिकल ऑपरेशंस में लोगों की ज़रूरत कम हुई है।
- AWS (Amazon Web Services): क्लाउड कंप्यूटिंग में अब AI-बेस्ड ऑटो-स्केलिंग और सर्वर मैनेजमेंट टूल्स ने जूनियर इंजीनियर्स के काम को रिप्लेस करना शुरू कर दिया है।
- HR & Recruitment: जब हायरिंग की रफ़्तार कम होती है, तो कंपनी सबसे पहले उन लोगों को कम करती है जिनका काम नए टैलेंट को लाना था।
AI Automation: एक ‘Silent Disruptor’ की भूमिका
इस बार की छंटनी 2023-24 की छंटनी से अलग है। तब कारण ‘Over-hiring’ था, लेकिन इस बार कारण ‘Technological Substitution’ है।
Amazon अपने ऑपरेशंस में GenAI (Generative AI) को भारी पैमाने पर इन्टीग्रेट कर रहा है। उदाहरण के लिए, अब कस्टमर सपोर्ट के 70% से ज्यादा मामले AI चैटबॉट्स द्वारा बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के सुलझाए जा रहे हैं। इसी तरह, इन्वेंट्री मैनेजमेंट और लॉजिस्टिक्स रूटिंग के लिए अब एल्गोरिदम इतने सटीक हो गए हैं कि उन्हें मैनेज करने के लिए पूरी टीम की ज़रूरत नहीं पड़ती।
Tech Job Market पर गहराता संकट: ‘Hire Fast, Fire Faster’
Amazon के साथ-साथ Google, Microsoft और Meta जैसी कंपनियों का नजरिया अब ‘Growth at all costs’ (हर कीमत पर विकास) से हटकर ‘Efficiency via AI’ (AI के जरिए सक्षमता) पर शिफ्ट हो गया है।
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि यह एक Workforce Transformation का युग है। Deloitte ने जहां अपने रोल्स को स्किल-आधारित बनाया, वहीं Amazon अब उन रोल्स को पूरी तरह खत्म कर रहा है जो रिपिटेटिव (Repetitive) हैं। कोडिंग के बेसिक टास्क अब ‘AI Pair Programmers’ कर रहे हैं, जिससे कंपनियों को कम हेडकाउंट के साथ अधिक आउटपुट मिल रहा है।
भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए ‘Red Alert’
भारत में Amazon के हज़ारों कर्मचारी हैं। बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई जैसे टेक हब्स में काम करने वाले इंजीनियर्स के लिए यह स्थिति एक Wake-up Call है।
भारतीय आईटी सेक्टर के लिए दो बड़ी चुनौतियां हैं:
- Outdated Skills: पुराने कोडिंग लैंग्वेज और मैनुअल टेस्टिंग अब इतिहास बन रहे हैं।
- Global Dependency: अमेरिकी कंपनियों के फैसलों का सीधा असर भारतीय सर्विस सेंटर्स और डेवलपमेंट सेंटर्स पर पड़ता है।
निष्कर्ष: कैसे करें खुद को ‘Future-Proof’?
विशेषज्ञों के अनुसार, भविष्य में सिर्फ वे ही बचेंगे जो AI के साथ (Co-exist) काम करना जानते हैं।
- Upskilling: अब सिर्फ कोडिंग नहीं, बल्कि ‘Prompt Engineering’ और ‘AI Model Tuning’ सीखना अनिवार्य है।
- Human-Centric Skills: जटिल समस्या समाधान (Complex Problem Solving) और इमोशनल इंटेलिजेंस ऐसी चीजें हैं जिनकी नकल AI फिलहाल नहीं कर सकता।
- Adaptability: एक ही रोल में सालों तक टिके रहने की मानसिकता छोड़नी होगी।
FAQ
- Q: क्या Amazon भारत में भी छंटनी कर रहा है?
- A: रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एक ग्लोबल रीस्ट्रक्चरिंग है, जिसका असर भारत सहित सभी प्रमुख केंद्रों पर पड़ेगा।
- Q: क्या AI वाकई में नौकरियों को खत्म कर रहा है?
- A: AI नौकरियों को खत्म नहीं बल्कि रिप्लेस कर रहा है। रिपिटेटिव और मैनुअल रोल्स खत्म हो रहे हैं, जबकि AI मैनेजमेंट और टेक्निकल रोल्स बढ़ रहे हैं।





