क्या भारत की दूसरी सबसे बड़ी IT कंपनी Infosys अपने एक सबसे बड़े क्लाइंट को खोने वाली है? जर्मन ऑटो दिग्गज Daimler के साथ चल रही ‘मेगा डील’ में दरार की खबरें आ रही हैं। मामला $150 मिलियन (करीब 1,200 करोड़ रुपये) के सालाना रेवेन्यू का है, और वजह है—पुराने बकाए और काम को लेकर खींचतान। क्या यह IT सेक्टर में बड़े कॉन्ट्रैक्ट्स के टूटने की शुरुआत है?
The Big News (पूरी खबर क्या है?):
Infosys के लिए यह हफ्ता तनावपूर्ण हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी का Daimler (Mercedes-Benz की पेरेंट कंपनी) के साथ चल रहा “Workplace Solutions” कॉन्ट्रैक्ट खतरे में है। यह कॉन्ट्रैक्ट Infosys के लिए सालाना $150 मिलियन का रेवेन्यू लाता है। पेंच यह है कि जहां साइबर सिक्योरिटी और डेटा सेंटर जैसी सेवाओं का रिन्यूअल 2029 तक हो चुका है, वहीं ‘वर्कप्लेस सॉल्यूशंस’ (जैसे लैपटॉप, आईटी सपोर्ट, ऑफिस टेक) का रिन्यूअल अधर में लटका है।
बात सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट रिन्यूअल की नहीं है, बल्कि भरोसे और पैसों की भी है। खबर है कि दोनों कंपनियों के बीच ‘एक्जीक्यूशन’ (काम की क्वालिटी/स्पीड) को लेकर विवाद चल रहा है। इसके अलावा, Infosys का Daimler पर करीब $47 मिलियन (लगभग 390 करोड़ रुपये) का बकाया भी फंसा हुआ है।
यह डील Infosys के लिए कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Daimler के लिए कंपनी ने एक अलग सब्सिडियरी ही बना रखी थी। लेकिन अब, Infosys के राइवल्स (प्रतिद्वंदी) इस मौके की ताक में बैठे हैं और इस कॉन्ट्रैक्ट के हिस्से को हथियाने के लिए अपनी बोली (bid) लगा रहे हैं।
इसका क्या असर होगा? (Expert Insight):
यह खबर सिर्फ Infosys के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी भारतीय IT इंडस्ट्री के लिए एक “Wake-up Call” है।
- The Era of ‘Unbundling’: पहले कंपनियां एक ही IT वेंडर को 10 साल के लिए सब कुछ (End-to-End) सौंप देती थीं। लेकिन अब ट्रेंड बदल रहा है। Daimler जैसी ग्लोबल कंपनियां अब “Best-of-Breed” मॉडल अपना रही हैं—यानी साइबर सिक्योरिटी किसी और को, और वर्कप्लेस सपोर्ट किसी और को। इससे रिस्क कम होता है और वेंडर्स के बीच कम्पटीशन बना रहता है। Infosys के हाथ से वर्कप्लेस सेगमेंट का जाना इसी ट्रेंड का हिस्सा हो सकता है।
- Margin Pressure: वर्कप्लेस सॉल्यूशंस और सर्विस डेस्क जैसे काम अब ‘कमोडिटी’ बन चुके हैं। इनमें मार्जिन कम होता है और ऑटोमेशन का दबाव ज्यादा। अगर Infosys यह कॉन्ट्रैक्ट खोती भी है, तो हो सकता है कंपनी का फोकस अब ‘High-Value’ AI और क्लाउड प्रोजेक्ट्स पर शिफ्ट हो जाए, जहां पैसा ज्यादा है।
- Reputation Risk: क्लाइंट का पैसा रोकना ($47M बकाया) और काम पर सवाल उठाना—ये दो ऐसी बातें हैं जो मार्केट में किसी भी IT कंपनी की इमेज डेंट कर सकती हैं। आने वाले दिनों में Infosys को यह साबित करना होगा कि यह सिर्फ एक आइसोलेटेड घटना है, न कि उनके काम करने के तरीके में कोई कमी।
आज की बड़ी बातें (Quick Take):
- खतरा: Infosys के Daimler कॉन्ट्रैक्ट का ‘Workplace Solutions’ हिस्सा रिन्यू न होने का रिस्क।
- वैल्यू: लगभग $150 मिलियन सालाना (Infosys के कुल बिजनेस का 0.7%)।
- विवाद की जड़: काम में देरी और $47 मिलियन की पुरानी पेमेंट का न मिलना।
- राहत की खबर: डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी का कॉन्ट्रैक्ट 2029 तक सुरक्षित है।
- कंपटीशन: अन्य बड़ी IT कंपनियां इस डील को तोड़ने के लिए कतार में हैं।
सूचना के लिए विभिन्न प्रतिष्ठित टेक और बिज़नेस न्यूज़ सोर्सेस (जैसे स्कैनएक्स, मिंट और इंडस्ट्री रिपोर्ट्स) की मदद ली गई है।





