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Zoho Founder Sridhar Vembu की चेतावनी: क्या AI के दौर में Software Developers को Alternative Careers के बारे में सोचना चाहिए?

On: February 8, 2026 7:00 AM
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Tech Industry News | भारत

भारतीय SaaS दिग्गज Zoho के founder Sridhar Vembu ने software industry को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने developers और IT professionals के बीच गंभीर बहस छेड़ दी है।

उनका कहना है कि software developers को अब “alternative livelihoods” यानी वैकल्पिक करियर विकल्पों पर भी विचार करना शुरू कर देना चाहिए, क्योंकि Artificial Intelligence (AI) की क्षमताएं इतनी तेज़ी से बढ़ रही हैं कि पारंपरिक coding skills पर दबाव बढ़ना तय है।


बयान का संदर्भ: यह चेतावनी क्यों दी गई?

Sridhar Vembu का यह बयान किसी panic या डर से नहीं, बल्कि एक structural बदलाव की शांत स्वीकृति के रूप में आया है। उन्होंने यह चर्चा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में Twitter) पर शुरू की थी, जहां उन्होंने AI-driven software development के कुछ हालिया उदाहरण साझा किए।

उनका मानना है कि software industry एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां बदलाव को नज़रअंदाज़ करना खतरनाक हो सकता है।


AI के उदाहरण जिन्होंने बहस को हवा दी

Vembu ने कुछ ठोस उदाहरणों का ज़िक्र किया, जिनसे यह साफ होता है कि AI अब केवल सहायक टूल नहीं रह गया है:

  • एक Bhagavad Gita app, जिसे बिना किसी मानव द्वारा सीधे कोड लिखे तैयार किया गया
  • Anthropic के Claude AI द्वारा पूरे का पूरा C compiler बनाए जाने की रिपोर्ट
  • AI systems का अब end-to-end applications डिजाइन और build करने में सक्षम होना

इन उदाहरणों के ज़रिए Vembu ने यह दिखाने की कोशिश की कि AI अब केवल syntax लिखने में मदद नहीं कर रहा, बल्कि core engineering tasks भी संभाल रहा है।


“Calm Acceptance”: डर नहीं, हकीकत की समझ

Vembu ने स्पष्ट किया कि उनकी बात को panic या doom के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
उनके अनुसार, यह एक “calm acceptance and embrace” है—एक ऐसी सच्चाई की, जिसमें software industry की प्रकृति बदल रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि यह सलाह वह खुद पर भी लागू करते हैं, यानी यह चेतावनी केवल junior developers के लिए नहीं है।


Coding से आगे की दुनिया: Developers की नई भूमिका

Vembu का मुख्य संदेश यह है कि आने वाले समय में:

  • Syntax लिखना सबसे कम मूल्य वाला काम बन सकता है
  • असली value होगी:
    • Problem-solving
    • Systems thinking
    • Architecture design
    • Business needs को technology में translate करना

AI जहां repetitive और low-level coding संभालेगा, वहीं इंसानों की भूमिका decision-making और context समझने में शिफ्ट होगी।


भविष्य की दो संभावनाएं: Optimistic या Dystopian?

Sridhar Vembu ने AI के भविष्य को लेकर दो बिल्कुल अलग रास्तों की ओर इशारा किया:

  1. Optimistic Future:
    जहां AI इंसानों की तकनीकी मेहनत कम कर देगा और लोग ज़्यादा समय:
    • परिवार
    • कला
    • समुदाय
    • जीवन के मानवीय पहलुओं
      पर दे पाएंगे।
  2. Dystopian Future:
    जहां AI और तकनीक कुछ गिने-चुने लोगों या संस्थाओं के हाथ में केंद्रित हो जाएगी, जिससे असमानता और नियंत्रण बढ़ सकता है।

उनके अनुसार, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि AI का ownership और control किसके हाथ में रहता है।


Industry Reaction: सहमति और असहमति दोनों

Vembu के बयान पर tech community में तीखी बहस देखने को मिली।

असहमति:
Capgemini Engineering के Director Raghu Kishore Vempati जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि engineers को सिर्फ code typing के लिए नहीं, बल्कि:

  • Complexity management
  • Security
  • Architecture design
    के लिए भुगतान किया जाता है।
    उनके अनुसार, मौजूदा AI systems अभी भी largely statistical reconstruction tools हैं।

सहमति और Adaptation:
वहीं, Arjun Prakash जैसे पेशेवरों का कहना है कि यह चेतावनी सही है, लेकिन समाधान डर नहीं बल्कि adaptation है।
उन्होंने AI की तुलना Excel से की—जिसने accountants की नौकरियां खत्म नहीं कीं, बल्कि उन्हें strategic roles में बदल दिया।


निष्कर्ष

Sridhar Vembu की चेतावनी किसी immediate job loss की भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि यह एक wake-up call है।

AI software developers की नौकरियां रातों-रात खत्म नहीं करेगा, लेकिन यह तय है कि:

  • केवल coding पर निर्भर करियर टिकाऊ नहीं रहेगा
  • Continuous learning, abstraction और higher-level thinking अनिवार्य होंगे

AI के इस दौर में survival का मंत्र डर नहीं, बल्कि evolution है।

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