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Microsoft 365 Copilot: TCS, Infosys, Wipro में 3 लाख से ज़्यादा सीट्स

On: June 9, 2026 6:24 AM
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Microsoft 365 Copilot - IT Samachar
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बेंगलुरु, 9 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): भारत की तीन सबसे बड़ी IT सर्विस कंपनियों — Infosys, TCS और Wipro — ने Microsoft 365 Copilot को अपने यहाँ हर एक में 1,00,000 से ज़्यादा कर्मचारियों तक पहुँचा दिया है, जिससे कुल आँकड़ा छह महीने से भी कम समय में 3,00,000 सीट्स के पार चला गया है। Microsoft ने यह उपलब्धि 3 जून 2026 को घोषित की।

यह सिर्फ़ एक लाइसेंसिंग आँकड़ा नहीं, बल्कि $245 अरब के भारतीय IT उद्योग का सोचा-समझा मोड़ है। तीनों कंपनियाँ AI को अब किसी अलग “प्रोडक्टिविटी टूल” की तरह नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के काम का ऑपरेटिंग मॉडल बना रही हैं — और यही बदलाव उनकी अगली कमाई और क्लाइंट डील्स तय करेगा।

क्या हुआ: 50,000 से 3,00,000 तक छह महीने में

यह घोषणा दिसंबर 2025 में हुई 50,000-सीट तैनाती पर आधारित है। यानी हर कंपनी ने आधे साल में अपनी Copilot तैनाती दोगुनी से ज़्यादा कर ली। Microsoft के मुताबिक़ यह उसकी दुनिया भर की सबसे बड़ी और तेज़ एंटरप्राइज़ AI तैनातियों में से एक है। वैश्विक स्तर पर भी Microsoft 365 Copilot की रफ़्तार तेज़ है — तिमाही में सीट्स 250% से ज़्यादा बढ़ीं और कुल भुगतान वाली सीट्स 2 करोड़ (20 मिलियन) तक पहुँच गईं।

तीनों भारतीय कंपनियाँ मिलकर 15 लाख से ज़्यादा लोगों को रोज़गार देती हैं, यानी मोटे तौर पर हर पाँच में से एक कर्मचारी के पास अब Copilot है।

आँकड़े: कौन कितना आगे

तीनों कंपनियों के अपनाने के आँकड़े मज़बूत हैं। Infosys में मंथली एक्टिव यूज़र्स 91% से ज़्यादा हैं। TCS में लाइसेंस पाए 86% कर्मचारी रोज़ AI का इस्तेमाल कर रहे हैं, और कई टीमों ने रिसर्च व कंटेंट प्रोडक्शन में 20-25% प्रोडक्टिविटी सुधार, दोगुनी तेज़ी से इनसाइट और चुनिंदा वर्क-साइकिल में 25-35% की कमी दर्ज की।

Wipro का आँकड़ा सबसे चौंकाने वाला है: 95% मंथली एक्टिव उपयोग, हर महीने 75 लाख प्रॉम्प्ट, प्रति यूज़र हर हफ़्ते औसतन 23 एक्शन, और हर तिमाही 2,50,000 FTE दिन की बचत। Wipro के कर्मचारियों ने 29,000 से ज़्यादा एंड-यूज़र एजेंट और 60 से ज़्यादा एंटरप्राइज़-ग्रेड एजेंटिक समाधान भी बनाए हैं; इसके अपने appraisal एजेंट ने परफ़ॉर्मेंस-रिव्यू की मेहनत क़रीब 70% घटा दी।

नेतृत्व क्या कह रहा है

Microsoft के अधिकारियों ने इसे “Intelligence + Trust” का उदाहरण बताया।

“Infosys, TCS और Wipro तैनाती से आगे बढ़कर AI को एक ऑपरेटिंग मॉडल बना रहे हैं — Copilot और एजेंट्स का इस्तेमाल बेहतर फ़ैसलों, तेज़ अमल और मज़बूत ग्राहक-परिणामों के लिए कर रहे हैं।” — Judson Althoff, CEO, Microsoft Commercial Business

Microsoft India और दक्षिण एशिया के प्रेसिडेंट Puneet Chandok ने कहा कि यह वही बदलाव है जो कंपनी अपने सबसे महत्वाकांक्षी ग्राहकों में देख रही है — AI के साथ प्रयोग से आगे बढ़कर उसके इर्द-गिर्द कारोबार खड़ा करना।

“वे Copilot को इस बात के केंद्र में रख रहे हैं कि उनकी टीमें कैसे काम करती हैं — इंटेलिजेंस को ट्रस्ट के साथ जोड़ते हुए, उस पैमाने पर जो सिर्फ़ असली एंटरप्राइज़ लीडर ही दे सकते हैं।” — Puneet Chandok, प्रेसिडेंट, Microsoft India और दक्षिण एशिया

तीनों भारतीय कंपनियों के CEO भी इस पर मुखर रहे। Infosys के Salil Parekh ने इसे “Infosys Topaz” के ज़रिए स्केल पर AI को रोज़मर्रा के काम में उतारने की रणनीति बताया, TCS के K. Krithivasan ने इसे “Human + AI ऑपरेटिंग मॉडल” और अपने tcsAI कार्यक्रम का हिस्सा कहा, जबकि Wipro के Srini Pallia ने इसे “proof-over-promise” सिद्धांत के अनुरूप “मापने योग्य मूल्य” पर केंद्रित बताया।

भारतीय IT के लिए मायने और चुनौतियाँ

इन कंपनियों के लिए असली दांव अंदरूनी प्रोडक्टिविटी से बड़ा है। ये तीनों Microsoft की सबसे बड़ी सॉल्यूशन-इंटीग्रेशन पार्टनर हैं, और 3,00,000 सीट्स से मिली सीख को वे अपने वैश्विक क्लाइंट्स के लिए सलाहकारी सेवाओं में बदलेंगी। $30 प्रति यूज़र/माह की लिस्ट कीमत पर भी यह एक बड़ा निवेश है, पर समय की बचत इसे जायज़ ठहराती है।

चुनौतियाँ भी हैं — डेटा रेज़िडेंसी, क्लाइंट गोपनीयता और जूनियर स्टाफ़ के AI आउटपुट पर ज़रूरत से ज़्यादा निर्भर होने का जोखिम। यही वजह है कि कंपनियों ने मानव समीक्षा और ऑडिट-ट्रेल अनिवार्य की है। यह कदम भारतीय IT के पारंपरिक “cost-arbitrage” मॉडल को भी बदल सकता है, क्योंकि Copilot जूनियर कर्मचारियों की क्षमता को निरंतर बढ़ाता है।

आगे क्या? (Outlook)

अगले 30-90 दिनों में देखने लायक़ तीन बातें: पहला, क्या Accenture (80,000 सीट्स), Cognizant और Capgemini जैसी वैश्विक प्रतिद्वंद्वी भी अपनी Copilot तैनाती तेज़ करती हैं। दूसरा, क्या भारतीय कंपनियाँ अपने गवर्नेंस और कस्टम प्लग-इन को क्लाइंट-फ़ेसिंग प्रोडक्ट और रेवेन्यू स्ट्रीम में बदलती हैं। तीसरा, अगली तिमाही नतीजों में AI-असिस्टेड डिलीवरी का असर मार्जिन पर कितना दिखता है। यह घोषणा भारत को एशिया में एजेंटिक AI अपनाने की रफ़्तार तय करने वाला बाज़ार बना रही है।

यह भी पढ़ें: Microsoft के नए AI कोडिंग मॉडल, Anthropic-OpenAI को चुनौती

स्रोत: Microsoft Source Asia, BusinessToday, PeopleMatters, WION, Storyboard18 (दिनांक तक की रिपोर्टिंग)।

Ganesh Thik

गणेश ठीक IT Samachar के संस्थापक एवं मुख्य लेखक हैं। IT Samachar के माध्यम से वे IT इंडस्ट्री से जुड़ी ताज़ा खबरें, कंपनी अपडेट्स, layoffs, AI और मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स पर विश्वसनीय जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराते हैं।

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