नई दिल्ली, 7 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): AI चिप शेयरों की तेज़ी ने भारत को global equity market capitalisation रैंकिंग में 7वें स्थान पर धकेल दिया है। Bloomberg-cited आंकड़ों के मुताबिक़ ताइवान का market cap क़रीब $4.95 ट्रिलियन और दक्षिण कोरिया का $5 ट्रिलियन से ऊपर पहुंच गया, जबकि भारत $4.84 ट्रिलियन पर रह गया।
यह दो हफ़्तों में भारत की दूसरी गिरावट है — पिछले महीने ताइवान और अब दक्षिण कोरिया ने इसे पीछे छोड़ा। इसका सीधा संदेश है कि AI युग में value creation अब सिर्फ़ software से नहीं, बल्कि उस semiconductor और hardware इकोसिस्टम से तय हो रहा है जो AI को चलाता है — और यहीं भारत की रणनीति में एक बड़ा अंतर दिखता है।
क्या हुआ: रैंकिंग में दूसरी गिरावट
Business Standard की रिपोर्ट (3 जून) के अनुसार दक्षिण कोरिया और ताइवान इसलिए ऊपर चढ़े क्योंकि वे AI सप्लाई चेन — semiconductors, memory chips और AI hardware — में निर्णायक स्थिति रखते हैं। दक्षिण कोरिया की Samsung Electronics और SK Hynix हाल ही में $1 ट्रिलियन valuation क्लब में शामिल हुई हैं, और इन्हीं ने कोरिया के equity surge को ताक़त दी है।
दिलचस्प यह कि market value में पिछड़ने के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था अब भी बड़ी है — भारत की GDP क़रीब $4.15 ट्रिलियन है, जबकि दक्षिण कोरिया की $1.93 ट्रिलियन। यानी फ़र्क़ economy के आकार का नहीं, बल्कि इस बात का है कि बाज़ार किन रणनीतिक तकनीकों को इनाम दे रहा है।
मुख्य तथ्य
- ताइवान: ~$4.95 ट्रिलियन market cap
- दक्षिण कोरिया: $5 ट्रिलियन से ऊपर
- भारत: ~$4.84 ट्रिलियन, रैंक 5वें से 7वें पर
- $1T क्लब: Samsung Electronics, SK Hynix
- GDP: भारत $4.15T बनाम दक्षिण कोरिया $1.93T
AI सप्लाई चेन का बंटवारा
इस उठापटक की जड़ AI डेटा सेंटरों की विस्फोटक मांग है। AI मॉडल को training और inference के लिए भारी मात्रा में high-bandwidth memory (HBM) चाहिए, और यहीं SK Hynix तथा Samsung दुनिया के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता हैं। दूसरी ओर ताइवान की TSMC दुनिया की सबसे बड़ी contract chip निर्माता है, जो Nvidia से लेकर Apple तक के advanced chip बनाती है। नतीजा यह कि AI hardware की पूरी value chain का बड़ा हिस्सा इन्हीं दो अर्थव्यवस्थाओं से होकर गुज़रता है, और निवेशक उन्हें इसी रणनीतिक स्थिति का इनाम दे रहे हैं। भारत, तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था होने के बावजूद, इस श्रृंखला में मुख्य रूप से उपभोक्ता बना हुआ है — यही अंतर अब बाज़ार मूल्य में दिखने लगा है।
‘सिर्फ़ data center काफ़ी नहीं’ — विशेषज्ञ
Polymatech Electronics के CEO Eswara Rao Nandam ने Business Standard से कहा कि data center बनाना और AI applications इस्तेमाल करना अकेले पर्याप्त नहीं होगा।
“The foundation of AI infrastructure lies in semiconductors, memory, packaging, power electronics, opto-electronics, substrates and high-reliability electronic components.” — Eswara Rao Nandam, CEO, Polymatech Electronics
उन्होंने आगाह किया कि छोटी कंपनियों को सहारा देने में सरकारी हिचक एक बड़ी बाधा है। उनके मुताबिक़ भारत को ऐसा framework बनाना होगा जहां भरोसेमंद mid-sized tech कंपनियां सख़्त milestones और accountability के साथ scale कर सकें।
भारत कहां चूक रहा है
LightSpeed Photonics के Founder व CEO Rohin Y ने ज़ोर दिया कि semiconductor ऐसा उद्योग नहीं जहां सिर्फ़ रफ़्तार से समस्या हल हो।
“Semiconductors are not an industry where speed alone can solve the problem. A fab does not operate in isolation.” — Rohin Y, Founder & CEO, LightSpeed Photonics
उनके अनुसार fab को specialty chemicals, gases, materials, साफ़ पानी, भरोसेमंद बिजली, precision equipment और प्रशिक्षित talent का पूरा इकोसिस्टम चाहिए। भारत के पास demand-side मौक़ा मज़बूत है — ख़ासकर automotive में, जहां EV, battery systems, charging circuits और onboard compute तेज़ी से electronics-heavy हो रहे हैं। 28nm, 65nm और 90nm जैसे mature nodes इन ज़रूरतों के लिए बेहद प्रासंगिक हैं।
दक्षिण कोरिया से सबक
विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरिया की आज की AI-windfall तीन दशक की औद्योगिक रणनीति का नतीजा है, जो semiconductors पर केंद्रित रही। जो देश semiconductor और AI hardware सप्लाई चेन के केंद्र में पहुंचे, उन्होंने यह काम design, manufacturing, materials, talent, infrastructure और end-market demand — सभी परतों पर धैर्य से किया।
Rohin Y के शब्दों में भारत के लिए असली सबक सरल है — “ambition starts the journey, but consistency creates leadership.” यानी महत्वाकांक्षा सफ़र शुरू करती है, पर नेतृत्व निरंतरता से बनता है।
Aage kya?
अगले कुछ महीनों में तीन चीज़ें तय करेंगी कि भारत यह अंतर कितनी तेज़ी से पाटता है — पहला, IndiaAI Mission और DLI जैसे कार्यक्रमों का दायरा mid-sized कंपनियों तक बढ़ना; दूसरा, automotive और industrial को anchor market बनाकर local IP व local manufacturing को जोड़ना; और तीसरा, fab के साथ-साथ materials, power और talent जैसी supporting layers का सही क्रम में खड़ा होना। बाज़ार रैंकिंग एक लक्षण है — असली पैमाना यह होगा कि भारत का chip इकोसिस्टम AI ग्रोथ की value में कितना हिस्सा पकड़ पाता है।
(पढ़ें: IndiaAI Mission: 34,381 GPU, ₹92/घंटा में H100)
स्रोत: Business Standard, Free Press Kashmir, Tejimandi, Bloomberg (cited), Whalesbook (दिनांक तक की रिपोर्टिंग)।





