बेंगलुरु, 24 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): भारत की AI कंपनी Sarvam ने $234 मिलियन (लगभग ₹1,950 करोड़) जुटाकर $1.5 बिलियन की वैल्यूएशन पर यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर लिया है। इस राउंड की अगुवाई IT सर्विसेज़ दिग्गज HCLTech ने की, जिसने अकेले $150 मिलियन लगाकर बेंगलुरु की इस कंपनी में करीब 10.46% हिस्सेदारी ली है।
यह सौदा ऐसे समय आया है जब दुनिया भर की सरकारें और कंपनियाँ अपनी “sovereign AI” क्षमता पर ज़ोर दे रही हैं — यानी अहम AI मॉडल और compute इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अपना नियंत्रण रखना। Sarvam उन गिनी-चुनी भारतीय कंपनियों में है जो model development, inference infrastructure और enterprise applications तक का पूरा full-stack AI बिज़नेस खड़ा करने में जुटी है। इसी वजह से यह राउंड भारत के AI ecosystem के लिए एक अहम संकेत माना जा रहा है।
राउंड में कौन-कौन शामिल
HCLTech इस Series B राउंड की lead strategic investor है। इसके अलावा Bessemer Venture Partners नई निवेशक के तौर पर जुड़ी, जबकि मौजूदा बैकर्स Khosla Ventures और Peak XV Partners ने भी हिस्सा लिया। TechCrunch के मुताबिक़ Sarvam का लक्ष्य इस Series B में कुल $300 मिलियन जुटाने का है, और मौजूदा $234 मिलियन इसी राउंड का पहला close है। यह निवेश कंपनी द्वारा दिसंबर 2023 में जुटाए गए $41 मिलियन (seed + Series A) के दो साल से ज़्यादा बाद आया है। निवेशकों की यह सूची बताती है कि घरेलू IT दिग्गज और वैश्विक venture फंड, दोनों भारत के foundation-model दांव पर एक साथ पैसा लगा रहे हैं।
दोनों पक्षों ने क्या कहा
HCLTech के CEO C. विजयकुमार ने कहा, “Sarvam में हमारा निवेश भारत के भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी AI ecosystem को खड़ा करने की दिशा में बड़ा क़दम है।” उन्होंने जोड़ा कि यह साझेदारी enterprises और सरकारों के लिए एक differentiated full-stack AI platform तैयार कर रही है, जिससे “secure, scalable और responsible AI” देने की क्षमता मज़बूत होगी।
Sarvam के सह-संस्थापक विवेक राघवन ने कहा, “हमारी महत्वाकांक्षा इस तकनीक को भारत में व्यापक रूप से फैलाने की है — नागरिकों, छोटे कारोबारों, enterprises और राज्य व केंद्र सरकारों के लिए मूल्य पैदा करना।” राघवन ने हाल के अमेरिकी export-control क़दमों को “wake-up call” बताते हुए कहा कि इन तकनीकों तक पहुँच को हल्के में नहीं लिया जा सकता, और यही वजह है कि देश में ऐसी कंपनियाँ ज़रूरी हैं जो इन्हें बुनियादी स्तर पर समझकर ख़ुद बना सकें।
कंपनी की पृष्ठभूमि और पैमाना
Sarvam की स्थापना विवेक राघवन और प्रत्युष कुमार ने की, जो पहले IIT मद्रास की भारतीय-भाषा AI रिसर्च पहल AI4Bharat से जुड़े थे — यह पहल टेक दिग्गज नंदन नीलेकणी द्वारा समर्थित रही है। इस साल की शुरुआत में कंपनी ने 30 बिलियन और 105 बिलियन पैरामीटर वाले open-source मॉडल लॉन्च किए थे, जिन्हें भारतीय भाषाओं और use cases के लिए डिज़ाइन किया गया है। कंपनी के अनुसार उसका conversational AI platform अब रोज़ 20 लाख से ज़्यादा interactions संभालता है, जबकि inference platform रोज़ाना क़रीब 1 करोड़ API calls प्रोसेस करता है। इसके speech models हर महीने 5 लाख घंटे से ज़्यादा ऑडियो ट्रांसक्राइब करते हैं और document AI सिस्टम 3.5 करोड़ पन्नों के रिकॉर्ड डिजिटाइज़ करने में इस्तेमाल हो रहे हैं। ये मॉडल banking, बीमा, सरकारी सेवाओं और रक्षा क्षेत्र में तैनात किए जा रहे हैं।
मुख्य तथ्य
कुल राउंड: $234 मिलियन (Series B पहला close) | वैल्यूएशन: $1.5 बिलियन | HCLTech निवेश: $150 मिलियन (≈10.46% हिस्सा) | Series B लक्ष्य: $300 मिलियन | संस्थापक: विवेक राघवन, प्रत्युष कुमार | मुख्यालय: बेंगलुरु।
भारतीय बाज़ार का संदर्भ
यह निवेश ऐसे मोड़ पर आया है जब भारत दुनिया के सबसे अहम AI बाज़ारों में गिना जा रहा है। TechCrunch की रिपोर्ट के अनुसार OpenAI और Anthropic दोनों ने भारत को अमेरिका के बाद अपना दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बताया है। फिर भी ऊँची compute लागत और सीमित पूँजी की वजह से भारत frontier AI मॉडल की दौड़ में बहुत कम गंभीर दावेदार खड़े कर पाया है। Sarvam के अनुसार उसके multilingual voice agents ने कृषि मंत्रालय के लिए 1.7 करोड़ किसानों से डेटा जुटाया, और एक बड़े बीमाकर्ता के अभियान ने 4.5 करोड़ पॉलिसीधारकों के नवीनीकरण में मदद की। एक बड़ी fintech कंपनी इसके agentic AI platform का इस्तेमाल 3.5 लाख से ज़्यादा की sales force को सहारा देने में कर रही है। यही ज़मीनी पैमाना इसे महज़ रिसर्च लैब से अलग करता है।
आगे क्या?
कंपनी का कहना है कि नई पूँजी agentic, coding और cybersecurity एप्लिकेशन पर केंद्रित अगली पीढ़ी के मॉडल की रिसर्च में लगेगी, साथ ही compute इन्फ्रास्ट्रक्चर तक पहुँच बढ़ाई जाएगी। अगले 30-90 दिनों में देखने लायक तीन बातें: एक, क्या Series B का बाक़ी $66 मिलियन भी जल्द क्लोज़ होता है; दो, HCLTech के enterprise सौदों में Sarvam के मॉडल कितनी तेज़ी से उतरते हैं; और तीन, banking, बीमा व रक्षा क्षेत्र में नए deployment की घोषणाएँ। निवेशकों की नज़र इस पर भी रहेगी कि घरेलू compute क्षमता बढ़ने के साथ Sarvam की training लागत कितनी घटती है।
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स्रोत: TechCrunch, Business Standard, Business Today, CIOL, Slator, Republic World (15-18 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।





