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Meta-Reliance डील: जामनगर में 168 MW AI डेटा सेंटर

On: June 11, 2026 1:22 AM
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Meta Reliance डेटा सेंटर - IT Samachar
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जामनगर/नई दिल्ली, 11 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): Meta ने भारत में अपना पहला AI-enabled डेटा सेंटर हासिल करने के लिए Reliance Industries (RIL) के साथ समझौता किया है। 10 जून को घोषित इस डील के तहत Reliance गुजरात के जामनगर में 168 मेगावाट (MW) क्षमता का built-to-suit hyperscale डेटा सेंटर बनाएगी, जिसकी क्षमता Meta लीज़ पर लेगी। फैसिलिटी दो साल के भीतर चालू होने की उम्मीद है।

यह समझौता भारत के डेटा सेंटर मार्केट के लिए अब तक के सबसे बड़े मील के पत्थरों में गिना जा रहा है। किसी ग्लोबल hyperscaler के लिए भारत में built-to-suit मॉडल पर बनने वाली यह पहली फैसिलिटी है — यानी डिज़ाइन से लेकर ऑपरेशन तक पूरा ढांचा एक ही ग्राहक, Meta, की AI ज़रूरतों के हिसाब से खड़ा होगा। डील की वित्तीय शर्तें दोनों कंपनियों ने सार्वजनिक नहीं की हैं।

डील में क्या-क्या शामिल है

समझौते के तहत Reliance सिर्फ़ इमारत बनाकर नहीं रुकेगी। कंपनी डिज़ाइन, कंस्ट्रक्शन, यूटिलिटी मैनेजमेंट, renewable energy सप्लाई, नेटवर्क कनेक्टिविटी और fully managed operations — छह स्तरों की सेवाएं देगी। InfotechLead की रिपोर्ट के अनुसार यह मॉडल Reliance को hyperscale AI इन्फ्रास्ट्रक्चर का single-source प्रोवाइडर बनाता है, जिसकी मांग AI क्षमता बढ़ा रहीं ग्लोबल टेक कंपनियों में तेज़ी से बढ़ रही है।

एनर्जी का इंतज़ाम भी डील का अहम हिस्सा है। Meta के मुताबिक़ कंपनी ने भारत में 900 MW से ज़्यादा renewable क्षमता सुरक्षित की है — क़रीब 837 MW सोलर-विंड प्रोजेक्ट CleanMax राजस्थान और कर्नाटक में विकसित कर रही है, जबकि 88 MW क्षमता Fourth Partner Energy तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की परियोजनाओं से आएगी। फैसिलिटी की कूलिंग के लिए desalinated समुद्री पानी इस्तेमाल होगा।

लीज़ मॉडल भी ग़ौर करने लायक़ है। Meta फैसिलिटी की मालिक नहीं होगी — वह क्षमता किराए पर लेगी, जबकि ज़मीन, बिल्डिंग और ऑपरेशन Reliance के पास रहेंगे। इंडस्ट्री में इसे asset-light विस्तार कहा जाता है: hyperscaler अपनी पूंजी GPU और AI मॉडल पर लगाता है, जबकि स्थानीय पार्टनर ज़मीन, बिजली और मंज़ूरियों का जोखिम उठाता है। समझौते में भविष्य में क्षमता बढ़ाने का विकल्प भी शामिल है, यानी 168 MW सिर्फ़ शुरुआती आंकड़ा है।

मुख्य तथ्य

  • क्षमता: 168 MW, built-to-suit, विस्तार का विकल्प शामिल
  • टाइमलाइन: दो साल के भीतर operational होने का लक्ष्य
  • एनर्जी: 900 MW+ renewable — CleanMax (837 MW) + Fourth Partner Energy (88 MW)
  • कूलिंग: desalinated समुद्री पानी; कनेक्टिविटी: Jio फाइबर + subsea cable नज़दीकी

ज़ुकरबर्ग और अंबानी ने क्या कहा

दोनों कंपनियों के प्रमुखों ने इस साझेदारी को भारत की AI तैयारी से जोड़ा।

“This world-class facility in Jamnagar will help us scale our AI infrastructure globally” — Mark Zuckerberg, Founder & CEO, Meta

ज़ुकरबर्ग ने यह भी जोड़ा कि यह निवेश भारत की अर्थव्यवस्था में Meta की लंबी अवधि की प्रतिबद्धता को और गहरा करता है।

“Jamnagar will become a landmark destination for hyperscale AI computing” — Mukesh Ambani, Chairman & MD, Reliance Industries

Mukesh Ambani के अनुसार Meta जैसे स्केल की ग्लोबल टेक्नोलॉजी कंपनी के लिए भारत का पहला built-to-suit डेटा सेंटर बनाना इस बात का प्रमाण है कि भारत ग्लोबल AI दौड़ में अगली पंक्ति में खड़ा होने के लिए तैयार है।

जामनगर ही क्यों चुना गया

जामनगर अब तक Reliance की दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी के लिए जाना जाता था। अब वही कैंपस कंपनी के energy-plus-compute विज़न का केंद्र बन रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार लोकेशन चुनने की चार बड़ी वजहें हैं — renewable energy संसाधनों तक सीधी पहुंच, पानी की उपलब्धता, पश्चिमी तट के submarine cable landing स्टेशनों से नज़दीकी, और Jio के देशव्यापी फाइबर नेटवर्क की कनेक्टिविटी। यही कॉम्बिनेशन AI workloads की भारी बिजली और कूलिंग ज़रूरतों को किफ़ायती बनाता है।

भारत के लिए क्या मायने रखता है

यह डील Meta की भारत में तीन-परत वाली रणनीति की आख़िरी कड़ी मानी जा रही है — 2020 में Jio Platforms में क़रीब $5.7 अरब का निवेश, भारत को जोड़ने वाला subsea केबल प्रोजेक्ट, और अब AI compute क्षमता। TechTimes के विश्लेषण के अनुसार इसके बाद Meta के पास भारत में compute से लेकर केबल तक का पूरा स्टैक होगा। Gartner का अनुमान है कि भारत की public cloud स्पेंडिंग 2026 में $17.5 अरब तक पहुंचेगी, और भारत का AI इन्फ्रास्ट्रक्चर बूम पहले से ही hyperscale निवेश खींच रहा है। इंडस्ट्री विश्लेषकों का मानना है कि Meta का यह क़दम Google और Microsoft जैसे बाक़ी hyperscalers पर भी भारत में built-to-suit क्षमता लेने का दबाव बढ़ाएगा।

रोज़गार और सप्लाई-चेन का पहलू भी छोटा नहीं है। डेटा सेंटर कंस्ट्रक्शन से सिविल, इलेक्ट्रिकल और कूलिंग इक्विपमेंट वेंडर्स को सीधा काम मिलेगा, जबकि operational फेज़ में नेटवर्क और फैसिलिटी इंजीनियरों की स्थायी मांग बनेगी। गुजरात सरकार की डेटा सेंटर पॉलिसी के तहत राज्य पहले से ऐसे निवेश पर इंसेंटिव देता है, और जामनगर प्रोजेक्ट उसके लिए सबसे बड़ा शोकेस बन सकता है।

आगे क्या? (Outlook)

अगले 30-90 दिनों में तीन चीज़ों पर नज़र रहेगी। पहला — कंस्ट्रक्शन की शुरुआत और परमिट/पावर इवैक्युएशन से जुड़े अपडेट, क्योंकि दो साल की डिलीवरी टाइमलाइन आक्रामक मानी जा रही है। दूसरा — Reliance की ओर से और hyperscaler क्लाइंट्स के ऐलान, क्योंकि कंपनी जामनगर में 1 गीगावाट तक स्केल की बात पहले कर चुकी है। तीसरा — Meta के India AI प्रोडक्ट रोडमैप पर असर, ख़ासकर Llama-आधारित एंटरप्राइज़ सेवाओं का विस्तार। साफ़ है कि भारत अब ग्लोबल AI compute नक़्शे पर सिर्फ़ बाज़ार नहीं, ठिकाना भी बन रहा है।

स्रोत: Meta Newsroom, CNBC, InfotechLead, Deccan Chronicle, DNA India, TechTimes (10-11 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।

Ganesh Thik

गणेश ठीक IT Samachar के संस्थापक एवं मुख्य लेखक हैं। IT Samachar के माध्यम से वे IT इंडस्ट्री से जुड़ी ताज़ा खबरें, कंपनी अपडेट्स, layoffs, AI और मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स पर विश्वसनीय जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराते हैं।

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