बेंगलुरु, 14 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): IT सर्विसेज़ कंपनी Wipro का ₹15,000 करोड़ का शेयर बायबैक 11 जून से टेंडर के लिए खुल चुका है और 17 जून शाम 5 बजे तक खुला रहेगा। कंपनी ₹250 प्रति शेयर की क़ीमत पर 60 करोड़ शेयर — कुल इक्विटी का 5.72% — वापस ख़रीद रही है, जो मौजूदा बाज़ार भाव से क़रीब 38% प्रीमियम है।
भारतीय IT सेक्टर में पिछले दो साल का यह सबसे बड़ा बायबैक है, और ऐसे समय आया है जब AI-led बदलाव के बीच IT कंपनियों पर शेयरधारकों को नकद लौटाने का दबाव बढ़ रहा है। शेयरधारकों के लिए सवाल सीधा है: टेंडर करें या होल्ड करें — और इसका गणित entitlement ratio में छिपा है।
बायबैक की पूरी डिटेल
Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार 10 जून को BSE पर Wipro का शेयर ₹181.60 पर था — यानी ₹250 का बायबैक भाव 37.66% प्रीमियम दर्शाता है। बायबैक का आकार कंपनी की standalone paid-up capital और free reserves का 24.99% और consolidated का 19.99% है — यानी SEBI की अधिकतम सीमा के बिल्कुल क़रीब। record date 5 जून 2026 थी।
यह बायबैक tender offer route से proportionate आधार पर हो रहा है। NYSE पर लिस्टेड Wipro के ADS धारकों (“WIT”) को हिस्सा लेने के लिए 2 जून तक अपने ADS रद्द करवाकर सीधे शेयरधारक बनना था।
छोटे शेयरधारकों के लिए गणित
SEC में दाख़िल Letter of Offer के अनुसार entitlement ratio दो श्रेणियों में बंटा है। छोटे शेयरधारक (record date पर ₹2 लाख तक की होल्डिंग): हर 56 शेयरों पर 11 शेयर टेंडर करने का हक़ — यानी क़रीब 19.6% acceptance entitlement। जनरल कैटेगरी: हर 197 शेयरों पर 10 शेयर — क़रीब 5.1%। बाज़ार के जानकार ध्यान दिलाते हैं कि एंटाइटलमेंट से ज़्यादा शेयर भी टेंडर किए जा सकते हैं; अन्य शेयरधारकों के कम भाग लेने पर अतिरिक्त शेयर भी स्वीकार हो सकते हैं।
मैनेजमेंट ने क्या कहा था
अप्रैल में बायबैक की घोषणा करते हुए CFO Aparna Iyer ने कहा था:
“हाल ही में संपन्न बोर्ड मीटिंग में निदेशक मंडल ने ₹250 के भाव पर ₹15,000 करोड़ के बायबैक की घोषणा की है, जो शेयरधारकों की मंज़ूरी के अधीन है।” — Aparna Iyer, CFO, Wipro
CEO & MD Srini Pallia ने उसी अवसर पर कंपनी की व्यापक दिशा पर कहा था:
“AI में तरक़्क़ी क्लाइंट प्राथमिकताओं को नया आकार दे रही है और हमारे लिए गहरी साझेदारी के नए अवसर बना रही है।” — Srini Pallia, CEO & Managing Director, Wipro
Wipro के लिए यह बायबैक क्यों अहम है
Wipro का शेयर पिछले एक साल में IT इंडेक्स से कमज़ोर प्रदर्शन करता रहा है, और ₹250 का भाव कंपनी के मौजूदा वैल्यूएशन पर मैनेजमेंट के भरोसे का संकेत माना जा रहा है। इसी साल कंपनी ने Olam Group से बड़ी strategic transformation डील जीती और उसकी IT यूनिट Mindsprint के अधिग्रहण की घोषणा की — यानी नकद लौटाने के साथ-साथ अधिग्रहण की भूख भी बनी हुई है। INDmoney के विश्लेषण के अनुसार बायबैक से शेयरों की संख्या घटेगी, जिससे आने वाली तिमाहियों में EPS को हल्का सहारा मिलेगा।
टैक्स का पहलू भी अहम है: 2024 के बाद के नियमों में बायबैक से मिली रक़म शेयरधारक के हाथ में dividend की तरह टैक्सेबल होती है, इसलिए ऊंचे टैक्स-स्लैब वाले निवेशकों के लिए शुद्ध फ़ायदा headline प्रीमियम से कम रह सकता है।
IT सेक्टर में नकद वापसी का ट्रेंड
FY26 के नतीजों के बाद से भारतीय IT कंपनियों के पास रिकॉर्ड नकदी जमा है, जबकि AI ऑटोमेशन के चलते बड़े पैमाने पर हायरिंग की ज़रूरत घटी है। ऐसे में बोर्डरूम का गणित बदला है — capex के बजाय buyback। Wipro से पहले TCS और Infosys भी हाल के वर्षों में बड़े बायबैक ला चुकी हैं। विश्लेषकों के अनुसार ऊंचे प्रीमियम वाले tender-route बायबैक छोटे निवेशकों के लिए short-term arbitrage का मौक़ा बनते हैं, पर असली रिटर्न acceptance ratio पर टिका होता है।
मुख्य तारीख़ें
टेंडर विंडो: 11–17 जून 2026। वेरिफ़िकेशन: 19 जून तक। स्वीकृति की सूचना: 23 जून तक एक्सचेंजों को। सेटलमेंट और रिफ़ंड: 24 जून 2026।
आगे क्या?
अगले 30 दिन में तीन चीज़ें देखने लायक़ होंगी। पहला, 23-24 जून को आने वाला फ़ाइनल acceptance ratio — रिटेल भागीदारी जितनी कम होगी, छोटे शेयरधारकों की स्वीकृति दर उतनी ही ऊंची जा सकती है — पिछले बड़े IT बायबैक में छोटी कैटेगरी की फ़ाइनल acceptance अक्सर entitlement से बेहतर रही है। दूसरा, बायबैक के बाद Wipro के शेयर भाव की चाल, क्योंकि settlement के बाद arbitrage पोज़ीशनें खुलती हैं। तीसरा, जुलाई में Q1FY27 नतीजे, जहां मैनेजमेंट से AI डील पाइपलाइन और मार्जिन आउटलुक पर टिप्पणी की उम्मीद रहेगी। (यह लेख केवल समाचार रिपोर्टिंग है, निवेश सलाह नहीं।)
स्रोत: Business Standard, BusinessToday, Wipro Letter of Offer (SEC filings), INDmoney, NewsX (12 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।





