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US पाबंदी के बाद भारत में ‘सॉवरेन AI’ पर बहस तेज़, IT कंपनियों की परीक्षा

On: June 23, 2026 1:29 AM
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सॉवरेन AI - IT Samachar
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नई दिल्ली, 23 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): 12 जून को अमेरिकी सरकार के एक निर्देश के बाद Anthropic ने अपने नए मॉडल Fable 5 और Mythos 5 तक ग़ैर-अमेरिकी नागरिकों की पहुँच रोक दी। इसी घटना ने भारतीय IT इंडस्ट्री में ‘सॉवरेन AI’ यानी देसी फ्रंटियर AI क्षमता बनाने की बहस को फिर गरमा दिया है।

यह सवाल अब केवल तकनीकी नहीं रहा। जब AI पायलट से निकलकर बड़े पैमाने की तैनाती (deployment) की ओर बढ़ रहा है, तब यह तय करना ज़रूरी हो गया है कि भारतीय कंपनियाँ विदेशी AI प्लेटफ़ॉर्म पर कितनी निर्भर रह सकती हैं।

क्या हुआ

Business Today की रिपोर्ट के मुताबिक़, अमेरिकी सरकार के 12 जून के निर्देश के तहत Anthropic को ग़ैर-नागरिकों के लिए पहुँच रोकनी पड़ी — यहाँ तक कि अमेरिका में मौजूद उसके ग़ैर-अमेरिकी कर्मचारियों के लिए भी। चूँकि ऐसा एक्सेस-कंट्रोल लागू करना व्यावहारिक नहीं था, कंपनी ने फ़िलहाल दोनों मॉडल हटा दिए। दिलचस्प बात यह कि यह घटनाक्रम TCS द्वारा Anthropic के साथ साझेदारी की घोषणा के ठीक एक दिन बाद आया, जिसके तहत भारत की सबसे बड़ी IT कंपनी ने 50,000 कर्मचारियों को Claude पर प्रशिक्षित करने की बात कही थी।

तत्काल असर सीमित

विश्लेषकों का मानना है कि इस निर्देश से भारतीय IT कंपनियों पर फ़ौरन बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि ज़्यादातर साझेदारियाँ अभी शुरुआती चरण में हैं। एक प्रमुख ब्रोकरेज के विश्लेषक के अनुसार, ‘ज़्यादातर कंपनियाँ अभी पायलट से प्रोडक्शन की ओर बढ़ रही हैं; इससे चालू प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ने की संभावना नहीं है।’ बड़ी IT कंपनियों ने एक से ज़्यादा AI कंपनियों के साथ काम कर अपने जोखिम बाँट भी रखे हैं — Tech Mahindra और Wipro Microsoft Azure OpenAI इकोसिस्टम में हैं, जबकि TCS के पास Anthropic, OpenAI और Mistral AI तीनों की साझेदारी है।

सॉवरेन AI बहस लौटी

इस प्रकरण ने भारत के अपने फ्रंटियर AI बनाने की माँग को नई धार दी है। Zoho के फ़ाउंडर Sridhar Vembu ने X पर लिखा कि भारत को तकनीकी आत्मनिर्भरता बनानी होगी और विदेशी प्लेटफ़ॉर्म पर निर्भरता घटानी होगी। हालाँकि हर कोई सहमत नहीं। Infosys के चेयरमैन Nandan Nilekani पहले तर्क दे चुके हैं कि भारत को ‘एक और LLM’ बनाने के बजाय ‘दुनिया की यूज़-केस कैपिटल’ बनने पर ध्यान देना चाहिए। इसी सोच की झलक HCLTech के Sarvam AI में $150 मिलियन के निवेश में दिखी — पहली बार किसी भारतीय IT कंपनी ने किसी देसी सॉवरेन AI वेंचर में हिस्सेदारी ली।

बहस के बीच कुछ आवाज़ें संतुलन की भी हैं। स्टार्टअप फ़ाउंडर Vijay Thirumalai ने Infosys, TCS और Zoho जैसी कंपनियों पर भारत की AI कमी का दोष मढ़ने को ‘आलसी’ तर्क बताया, यह कहते हुए कि देश की असली ताक़त बड़े पैमाने पर AI लागू करने में है। ग़ौरतलब है कि HCL Tech जून 2025 में OpenAI से साझेदारी करने वाली पहली भारतीय कंपनियों में थी, जिसके तहत वह अपने मॉडलों और एजेंटिक समाधानों में इसे जोड़ रही है।

IT कंपनियाँ फिर भी क्यों ज़रूरी

जनरेटिव AI के आने पर शुरुआत में डर था कि कोडिंग टूल पारंपरिक IT सेवाओं की कमाई खा जाएँगे। लेकिन MIT Media Lab की 2025 के अंत की एक रिपोर्ट के अनुसार 95% AI पायलट ख़राब एंटरप्राइज़ इंटीग्रेशन के कारण विफल होते हैं — और यही वह खाई है जिसे भारतीय IT कंपनियाँ भरने की कोशिश कर रही हैं। Everest Group के पार्टनर Yugal Joshi के मुताबिक़, ‘एक बार बड़े सिस्टम इंटीग्रेटर किसी प्लेटफ़ॉर्म के पीछे आ जाते हैं, तो वे एंटरप्राइज़-क्लास समाधान बनाते हैं जो कंपनियों के गवर्नेंस और कारोबारी सीमाओं के भीतर चलते हैं।’

बाज़ार और अवसर

ICICI Securities की रिपोर्ट ‘Sound and Fury: The AI Question’ के अनुसार AI-आधारित सेवाएँ 2030 तक $300–400 बिलियन का कुल बाज़ार (TAM) बना सकती हैं, जबकि मौजूदा IT सेवा बाज़ार $280–300 बिलियन का है। रिपोर्ट का यह भी अनुमान है कि AI 17 करोड़ नई नौकरियाँ पैदा कर सकता है, भले ही वह 9.2 करोड़ पारंपरिक नौकरियों को विस्थापित करे। साथ ही ICICI Securities ने आगाह किया कि अगले कुछ वर्षों में ऑटोमेशन से पारंपरिक सेवाओं की आय में सालाना 2–3% की गिरावट भी आ सकती है।

TCS के CEO एवं MD K Krithivasan ने Anthropic साझेदारी के समय कहा था, ‘एंटरप्राइज़ AI का मूल्य कारोबारी संदर्भ समझने, जटिल सिस्टम को व्यवस्थित करने और गहरी AI इंजीनियरिंग प्रतिभा लगाने से आता है।’ वहीं Infosys के CEO Salil Parekh ने OpenAI सहयोग के वक़्त कहा था कि ‘जनरेटिव और एजेंटिक AI यह नए सिरे से तय करेंगे कि उद्यम कैसे काम करते और बढ़ते हैं।’

आगे क्या?

आने वाले हफ़्तों में नज़र इस पर रहेगी कि क्या ये पाबंदियाँ बनी रहती हैं, क्या भारत में सॉवरेन मॉडल के लिए नई फंडिंग आती है, और क्या कंपनियाँ मल्टी-मॉडल रणनीति को और मज़बूत करती हैं। साफ़ संकेत यह है कि फ्रंटियर मॉडल तक पहुँच अब केवल तकनीक और क़ीमत से नहीं, भू-राजनीति से भी तय होगी।

स्रोत: Business Today, TechCrunch, ICICI Securities (‘Sound and Fury’ रिपोर्ट), MIT Media Lab, Everest Group (दिनांक तक की रिपोर्टिंग)।

Ganesh Thik

गणेश ठीक IT Samachar के संस्थापक एवं मुख्य लेखक हैं। IT Samachar के माध्यम से वे IT इंडस्ट्री से जुड़ी ताज़ा खबरें, कंपनी अपडेट्स, layoffs, AI और मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स पर विश्वसनीय जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराते हैं।

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