बेंगलुरु, 22 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): अमेरिकी साइबरसिक्योरिटी कंपनी N-able ने बेंगलुरु में अपना नया Global Capability Centre (GCC) खोल दिया है। 15 जून को शुरू हुए इस केंद्र में फ़िलहाल 100 से अधिक पेशेवर काम कर रहे हैं, और कंपनी ने 2026 के अंत तक इस संख्या में 50% या उससे ज़्यादा बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा है।
यह क़दम उस बड़े रुझान का हिस्सा है जिसमें वैश्विक टेक और साइबरसिक्योरिटी कंपनियाँ भारत को सिर्फ़ बैक-ऑफ़िस नहीं, बल्कि उत्पाद और सुरक्षा-नवाचार का केंद्र बना रही हैं। बढ़ते AI-आधारित साइबर ख़तरों के बीच N-able का यह निवेश दिखाता है कि रक्षात्मक AI क्षमताएँ बनाने के लिए भारतीय इंजीनियरिंग प्रतिभा कितनी अहम हो गई है।
केंद्र क्या करेगा
N-able दुनिया भर में 5,00,000 से अधिक संगठनों को IT मैनेजमेंट, साइबरसिक्योरिटी और डेटा-प्रोटेक्शन सॉफ़्टवेयर देती है। Business Standard के अनुसार, बेंगलुरु केंद्र इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट मैनेजमेंट, यूज़र एक्सपीरियंस और security operations जैसी मुख्य ज़िम्मेदारियाँ संभालेगा।
केंद्र का ख़ास फ़ोकस defensive AI पर होगा — यानी स्वचालित ख़तरा-पहचान (automated threat detection), निगरानी और तेज़ प्रतिक्रिया। भारत में, जहाँ संगठन बढ़ते साइबर जोखिम और डेटा-सुरक्षा नियमों दोनों से जूझ रहे हैं, यह विस्तार ख़ासकर छोटे एवं मध्यम कारोबारों (SMBs) के लिए अनुपालन और साइबर-लचीलापन मज़बूत करेगा। N-able का बड़ा ग्राहक-आधार मैनेज्ड सर्विस प्रोवाइडर (MSPs) हैं, जो आगे छोटे कारोबारों को सुरक्षा सेवाएँ देते हैं।
मुख्य तथ्य
केंद्र: बेंगलुरु GCC, शुरुआत 15 जून 2026। मौजूदा स्टाफ़: 100+। लक्ष्य: 2026 अंत तक 50%+ विस्तार। वैश्विक ग्राहक: 5,00,000+ संगठन। कार्य: इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट, UX, security operations। फ़ोकस: defensive AI, SMB सुरक्षा।
कंपनी नेतृत्व क्या बोला
N-able के CEO John Pagliuca ने कहा, “बेंगलुरु ऑफ़िस खोलना यह दिखाता है कि हम गहरी तकनीकी प्रतिभा वाले बाज़ार में निवेश कर के असली business resilience को कैसे स्केल कर रहे हैं।”
कंपनी के Chief Technology and Product Officer Mike Adler ने जोड़ा, “बेंगलुरु में एक ही छत के नीचे गहरी विशेषज्ञता के साथ, हम AI-संचालित नवाचार से लेकर आधुनिक security operations तक अगली पीढ़ी की क्षमताएँ तेज़ी से बना रहे हैं।” उन्होंने कहा कि इसका मक़सद IT और सुरक्षा पेशेवरों को “तेज़ी से जवाब देने और बदलते ख़तरे से आगे रहने” में सक्षम बनाना है।
पृष्ठभूमि: भारत में GCC लहर
भारत बीते कुछ वर्षों में Global Capability Centres का सबसे पसंदीदा ठिकाना बन गया है। अनुमान है कि 2026 के अंत तक भारत का GCC कार्यबल 23.6 लाख (2.36 मिलियन) कर्मचारियों तक पहुँच जाएगा, जिसमें साइबरसिक्योरिटी और AI सबसे ज़्यादा माँग वाले कौशल हैं। बेंगलुरु इस लहर का केंद्र रहा है, जहाँ वैश्विक कंपनियाँ इंजीनियरिंग और सुरक्षा संचालन के बड़े हिस्से को स्थानांतरित कर रही हैं।
N-able ख़ुद 2021 में IT-मैनेजमेंट कंपनी SolarWinds से अलग होकर एक स्वतंत्र कंपनी बनी थी, और तब से MSP-केंद्रित सुरक्षा बाज़ार में अपनी पहचान बना रही है। हाल के महीनों में कई वैश्विक फ़र्मों ने भारत में अपने तकनीकी केंद्रों का विस्तार किया है, जो दिखाता है कि देश अब केवल सेवा-वितरण नहीं बल्कि उत्पाद और सुरक्षा-नवाचार में भी भूमिका निभा रहा है।
भारतीय IT उद्योग के लिए मायने
N-able जैसी प्रोडक्ट-कंपनी का सीधे बेंगलुरु में security operations केंद्र खोलना भारतीय इंजीनियरों के लिए उच्च-मूल्य वाली, उत्पाद-केंद्रित भूमिकाओं का संकेत है — न कि केवल सपोर्ट कार्य। उद्योग विश्लेषकों के मुताबिक़ साइबरसिक्योरिटी प्रतिभा की वैश्विक कमी के बीच भारत का गहरा टैलेंट पूल इन GCCs को रणनीतिक रूप से अनिवार्य बना रहा है। इससे स्थानीय रोज़गार सृजन को बढ़ावा मिलता है और बेंगलुरु की “साइबर टैलेंट हब” वाली छवि और मज़बूत होती है।
भारत में डेटा-सुरक्षा को लेकर नियामकीय दबाव भी बढ़ा है। डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) ढाँचे के लागू होने के साथ कंपनियों पर अपने डेटा और सिस्टम सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी बढ़ी है, जिससे साइबरसिक्योरिटी उत्पादों और विशेषज्ञों की माँग और तेज़ हुई है। ऐसे में बेंगलुरु जैसे केंद्र से उत्पाद बनाना वैश्विक कंपनियों को न सिर्फ़ प्रतिभा बल्कि बाज़ार-निकटता भी देता है। विश्लेषक मानते हैं कि अगले कुछ वर्षों में भारत साइबरसिक्योरिटी इंजीनियरिंग का एक प्रमुख वैश्विक आधार बन सकता है, बशर्ते कुशल प्रतिभा की आपूर्ति और प्रशिक्षण ढाँचा इसी रफ़्तार से बढ़ता रहे। यही कारण है कि कई कंपनियाँ केवल भर्ती ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्किलिंग और विश्वविद्यालय साझेदारियों में भी निवेश कर रही हैं।
आगे क्या?
अगले 30-90 दिनों में देखने लायक़ होगा कि N-able बेंगलुरु में किस रफ़्तार से भर्ती करती है और क्या वह वर्ष के अंत तक 50% विस्तार लक्ष्य की ओर बढ़ती है। साथ ही यह अहम होगा कि केंद्र किस तरह के defensive-AI उत्पाद बाज़ार में लाता है, और क्या SMB-केंद्रित साइबर-सुरक्षा पेशकश भारतीय ग्राहकों तक भी पहुँचती है — फ़िलहाल कंपनी का ज़ोर मुख्यतः वैश्विक MSP बाज़ार पर है।
स्रोत: N-able (आधिकारिक प्रेस), Business Standard, BusinessWire, CityBiz, Sahyadri Startups, Republic World (दिनांक तक की रिपोर्टिंग)।





