नई दिल्ली / बेंगलुरु, 23 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): बेंगलुरु की AI कंपनी Sarvam ने $234 मिलियन की फंडिंग जुटाकर $1.5 बिलियन के वैल्यूएशन पर भारत के यूनिकॉर्न क्लब में जगह बना ली है। इस Series B राउंड की अगुवाई IT सर्विसेज़ दिग्गज HCLTech ने की, जिसने अकेले $150 मिलियन (करीब ₹1,427 करोड़) लगाकर कंपनी में 10.46% हिस्सेदारी ख़रीदी।
यह सिर्फ़ एक बड़ी फंडिंग डील नहीं है। पहली बार किसी भारतीय IT सर्विसेज़ कंपनी ने किसी देसी ‘सॉवरेन AI’ वेंचर में रणनीतिक हिस्सेदारी ली है — और यह ऐसे समय हुआ है जब फ्रंटियर AI मॉडल तक पहुँच पर भू-राजनीति का साया गहरा रहा है।
फंडिंग में नया क्या है
Sarvam के मुताबिक़ राउंड में मौजूदा निवेशकों Khosla Ventures और Peak XV Partners के साथ Bessemer Venture Partners ने भी हिस्सा लिया। कंपनी का लक्ष्य Series B में कुल $300 मिलियन जुटाने का है, यानी अभी राउंड पूरा होना बाक़ी है। TechCrunch की रिपोर्ट के अनुसार यह निवेश Sarvam के उन शुरुआती $41 मिलियन (सीड और Series A) के दो साल से ज़्यादा बाद आया है, जो उसने 2023 में जुटाए थे।
HCLTech ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में पुष्टि की कि उसने 41,421 इक्विटी शेयर ख़रीदकर 10.46% हिस्सेदारी ली है, जिसकी कुल क़ीमत ₹1,427.25 करोड़ है। ख़बर के बाद HCL Tech का शेयर BSE पर क़रीब 3.8% चढ़कर ₹1,161.75 पर पहुँचा।
यह राउंड Sarvam के लिए सिर्फ़ पूँजी नहीं, दिशा भी है। कंपनी ने इसी साल की शुरुआत में 30 बिलियन और 105 बिलियन पैरामीटर वाले अपने ओपन-सोर्स मॉडल लॉन्च किए थे, और अब उन मॉडलों के पीछे एक गहरी जेब वाला रणनीतिक साझेदार खड़ा हो गया है। Sarvam उन गिने-चुने स्टार्टअप्स में है जो मॉडल डेवलपमेंट, इन्फ़रेंस इन्फ़्रास्ट्रक्चर और एंटरप्राइज़ एप्लिकेशन — तीनों परतों वाला ‘फुल-स्टैक’ AI कारोबार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कंपनी के मुताबिक़ उसके मॉडल भारतीय भाषाओं और इस्तेमाल के मामलों के लिए बनाए गए हैं, और इन्हें बैंकिंग, बीमा, सरकारी सेवाओं तथा रक्षा जैसे क्षेत्रों में तैनात किया जा रहा है।
Sarvam का असली पैमाना
Sarvam की ताक़त उसके इस्तेमाल के आँकड़ों में दिखती है। कंपनी के अनुसार उसका कन्वर्सेशनल AI प्लेटफ़ॉर्म रोज़ 20 लाख से ज़्यादा इंटरैक्शन संभालता है, जबकि इन्फ़रेंस प्लेटफ़ॉर्म रोज़ाना क़रीब 1 करोड़ API कॉल प्रोसेस करता है। इसके स्पीच मॉडल हर महीने 5 लाख घंटे से ज़्यादा ऑडियो ट्रांसक्राइब करते हैं और डॉक्यूमेंट AI सिस्टम 3.5 करोड़ से ज़्यादा पन्नों को डिजिटाइज़ करने में लगे हैं।
ये टूल अब बड़े पैमाने पर ज़मीन पर उतर रहे हैं। कंपनी का दावा है कि उसके मल्टीलिंगुअल वॉइस एजेंट कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के लिए 1.7 करोड़ किसानों से डेटा जुटा चुके हैं, और एक बड़ी बीमा कंपनी के राष्ट्रव्यापी वॉइस कैंपेन ने 4.5 करोड़ पॉलिसीधारकों के रिन्यूअल में मदद की। एक बड़ी फिनटेक कंपनी इसके एजेंटिक AI प्लेटफ़ॉर्म से 3.5 लाख से ज़्यादा सेल्सकर्मियों की टीम को सपोर्ट कर रही है।
किसने क्या कहा
Sarvam के को-फ़ाउंडर Vivek Raghavan ने कहा, ‘हमारी महत्वाकांक्षा इस तकनीक को भारत में व्यापक रूप से फैलाने की है, ताकि नागरिकों, छोटे कारोबारों, उद्यमों और राज्य व केंद्र सरकारों के लिए हर क्षेत्र में बड़ा मूल्य बने।’ उन्होंने जोड़ा कि कंपनी ग्राहकों को ‘AI अपनाने और उस पर नवाचार करने, दोनों में’ मदद देने की स्थिति में है।
HCLTech के CEO एवं MD C Vijayakumar ने इस निवेश को ‘भारत के भरोसेमंद और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी AI इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में एक अहम क़दम’ बताया। उनके मुताबिक़ Sarvam में ‘भारत से उभरने वाली सबसे प्रभावशाली AI कंपनियों में शामिल होने की सारी ख़ूबियाँ’ मौजूद हैं।
HCLTech को क्या मिलेगा
योजना है कि Sarvam के AI मॉडल को HCLTech के एंटरप्राइज़ रिश्तों, इंजीनियरिंग वर्कफ़ोर्स और सॉफ़्टवेयर एसेट्स के साथ जोड़कर कारोबारों और सरकारों के लिए AI प्रोडक्ट बनाए जाएँ। ब्रोकरेज Nomura ने HCL Tech को FY28 की अनुमानित प्रति शेयर आय (EPS) ₹79.60 के 14 गुना पर वैल्यू किया है, यानी विश्लेषक इस दांव को लेकर सतर्क रूप से सकारात्मक हैं।
भारत का AI दांव
यह सौदा ऐसे वक़्त आया है जब भारत दुनिया के सबसे अहम AI बाज़ारों में गिना जा रहा है — OpenAI और Anthropic, दोनों भारत को अमेरिका के बाद अपना दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बता चुके हैं। फिर भी फ्रंटियर मॉडल बनाने की दौड़ में भारत के पास गिने-चुने दावेदार हैं, क्योंकि ऊँची कंप्यूट लागत और पूँजी की सीमित पहुँच आड़े आती रही है। Sarvam के संस्थापक Vivek Raghavan और Pratyush Kumar पहले IIT मद्रास की भाषा-AI पहल AI4Bharat से जुड़े थे, जिसे टेक दिग्गज नंदन नीलेकणी का समर्थन हासिल है।
सॉवरेन AI की यह बहस पिछले हफ़्ते और तीखी हुई, जब Anthropic ने अमेरिकी सरकार के निर्देश के बाद अपने नवीनतम मॉडल ग़ैर-अमेरिकी नागरिकों के लिए बंद कर दिए। इस घटना ने रेखांकित किया कि सबसे उन्नत AI सिस्टम तक पहुँच अब भी मुट्ठीभर विदेशी प्रदाताओं तक सिमटी है — और यही वजह है कि HCLTech जैसी कंपनी का देसी मॉडल पर दांव लगाना मायने रखता है।
आगे क्या?
अगले कुछ महीनों में तीन चीज़ों पर नज़र रहेगी। पहला — Series B के बचे हुए हिस्से को पूरा कर $300 मिलियन तक पहुँचना। दूसरा — कंपनी का कहना है कि नई पूँजी एजेंटिक, कोडिंग और साइबरसिक्योरिटी पर केंद्रित अगली पीढ़ी के मॉडल की रिसर्च में लगेगी। तीसरा — जैसे-जैसे डिप्लॉयमेंट बढ़ेंगे, कंप्यूट इन्फ़्रास्ट्रक्चर तक पहुँच का विस्तार ही असली परीक्षा होगा।
स्रोत: TechCrunch, Business Standard, Business Today, HDFC Sky, Outlook Business, Analytics Insight (दिनांक तक की रिपोर्टिंग)।





