नई दिल्ली, 9 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): भारत का एंड-यूज़र पब्लिक क्लाउड खर्च 2026 में 28.1% बढ़कर $17.5 अरब तक पहुँचने का अनुमान है, जो 2025 के $13.7 अरब से बड़ी छलांग है। रिसर्च फर्म Gartner का यह ताज़ा आँकड़ा उसी पूँजी-लहर का सबसे साफ़ संकेत है, जिसमें Reliance से लेकर NVIDIA तक देश में गीगावॉट-स्केल AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अरबों डॉलर लगा रहे हैं।
यह सिर्फ़ खर्च का आँकड़ा नहीं है। AI मॉडल ट्रेनिंग और इन्फ़रेंस की भूख ने भारत को अचानक दुनिया के सबसे तेज़ बढ़ते डेटा-सेंटर बाज़ारों में ला खड़ा किया है। इसका सीधा असर डेटा लोकलाइज़ेशन, इंजीनियरिंग नौकरियों और बिजली-पानी की माँग पर पड़ेगा — और यही वजह है कि यह कहानी हर भारतीय IT पेशेवर और निवेशक के लिए मायने रखती है।
क्लाउड खर्च में उछाल: Gartner का आँकड़ा क्या कहता है
Gartner के मुताबिक़ 2026 में भारतीय संगठनों के लिए PaaS (Platform as a Service) सबसे बड़ी खर्च श्रेणी रहेगी, जो $6.4 अरब तक पहुँचेगी, क्योंकि एंटरप्राइज़ अपने टेक्नोलॉजी फ़ाउंडेशन को AI-आधारित कामों के लिए दोबारा खड़ा कर रहे हैं। ग्रोथ की रफ़्तार 28.1% है, जो वैश्विक औसत से कहीं ज़्यादा तेज़ है।
Gartner के सीनियर प्रिंसिपल एनालिस्ट Ashish Banerjee ने इस ट्रेंड की वजह साफ़ बताई।
“AI-ready क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर की मज़बूत एंटरप्राइज़ माँग भारत में क्लाउड निवेश की प्राथमिकताएँ नए सिरे से तय कर रही है।” — Ashish Banerjee, सीनियर प्रिंसिपल एनालिस्ट, Gartner
इसका मतलब है कि कंपनियाँ अब क्लाउड को केवल स्टोरेज या ईमेल के लिए नहीं, बल्कि AI वर्कलोड चलाने के इंजन के तौर पर देख रही हैं।
Reliance का ₹1.6 लाख करोड़ दांव: विशाखापत्तनम
Reliance Industries आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में भोगापुरम एयरपोर्ट के पास 1.5 गीगावॉट का डेटा-सेंटर क्लस्टर बना रही है, जिस पर करीब $17 अरब (₹1.6 लाख करोड़) का निवेश प्रस्तावित है। पूरा होने पर यह भारत का सबसे बड़ा डेटा-सेंटर हब होगा। आंध्र प्रदेश इन्वेस्टमेंट प्रमोशन कमेटी ने इस निवेश को 25 अप्रैल 2026 को मंज़ूरी दी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ परियोजना के लिए करीब 935 एकड़ ज़मीन तय हुई है — पहले चरण के लिए 300 एकड़ और दूसरे चरण के लिए 635 एकड़, साथ में एक केबल लैंडिंग स्टेशन और 80 एकड़ का desalination प्लांट। पहले चरण में पोलिपल्ली गाँव में 500 मेगावॉट की क्षमता बनेगी, जिसके अक्टूबर 2028 तक चालू होने की उम्मीद है। बिजली के लिए कंपनी 9,000 मेगावॉट-पीक की कैप्टिव सोलर क्षमता पर काम कर रही है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि इस परियोजना के आकार को लेकर अलग-अलग आँकड़े भी सामने आए हैं — कुछ पुरानी रिपोर्ट्स में Brookfield और Digital Realty के साथ साझेदारी में 2030 तक $11 अरब के निवेश का ज़िक्र था। चेयरमैन Mukesh Ambani इस पूँजी को दीर्घकालिक रणनीति बता चुके हैं।
“यह धैर्यवान, अनुशासित, राष्ट्र-निर्माण की पूँजी है — जो आने वाले छह दशकों के लिए टिकाऊ आर्थिक मूल्य और रणनीतिक मज़बूती बनाने के लिए है।” — Mukesh Ambani, चेयरमैन, Reliance Industries
NVIDIA की बेंगलुरु में सबसे बड़ी ऑफिस डील
दूसरी ओर, AI चिप दिग्गज NVIDIA ने बेंगलुरु में करीब 7.6 लाख वर्ग फुट (760,000 sq ft) ऑफिस स्पेस की 10-साल की लीज़ साइन की है — जो भारत में किसी एक कंपनी द्वारा ली गई अब तक की सबसे बड़ी ऑफिस डील मानी जा रही है। यह स्पेस महादेवपुरा स्थित Bagmane Capital के Memphis South Tower में 12 मंज़िलों पर फैला है।
Deccan Herald की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल से प्रभावी इस लीज़ का मासिक किराया करीब ₹85.9 करोड़ ($9.1 मिलियन) यानी ₹113 प्रति वर्ग फुट है, जिसमें हर तीन साल में 15% बढ़ोतरी तय है; पूरे टर्म में डील की कीमत ₹12 अरब से ज़्यादा आँकी गई है। इस सौदे से NVIDIA का भारत में ऑफिस फुटप्रिंट लगभग दोगुना होकर बेंगलुरु और पुणे मिलाकर 11.3 लाख वर्ग फुट से ऊपर पहुँच गया है।
भारतीय angle: टैलेंट, डेटा और बिजली का सवाल
इन सौदों का सीधा फ़ायदा भारत के इंजीनियरिंग टैलेंट पूल को है — NVIDIA की विस्तार योजना का मक़सद ही देश की गहरी इंजीनियरिंग प्रतिभा का दोहन है। साथ ही डेटा लोकलाइज़ेशन के नियमों के बीच घरेलू डेटा-सेंटर क्षमता भारतीय कंपनियों के लिए अनुपालन आसान बनाती है। Reliance की Google Cloud के साथ साझेदारी, जिसमें TPU एक्सेस और Gemini Enterprise को भारतीय संगठनों तक पहुँचाना शामिल है, इस दिशा में एक और संकेत है।
हालाँकि चुनौतियाँ भी छोटी नहीं। 1.5 गीगावॉट क्षमता का मतलब है भारी बिजली और पानी की खपत — यही वजह है कि Reliance कैप्टिव सोलर और desalination प्लांट साथ में बना रही है। ग्रिड पर दबाव और ज़मीन अधिग्रहण की रफ़्तार आगे की असली परीक्षा होगी।
आगे क्या? (Outlook)
अगले 30-90 दिनों में तीन चीज़ें देखने लायक़ हैं। पहला, आंध्र प्रदेश में Reliance परियोजना के लिए ज़मीन आवंटन और पहले चरण का सिविल वर्क कितनी तेज़ी से बढ़ता है। दूसरा, Gartner के PaaS अनुमान के अनुरूप हाइपरस्केलर (AWS, Azure, Google Cloud) भारत में नए रीजन और कैपेक्स की घोषणाएँ करते हैं या नहीं। तीसरा, बढ़ती बिजली माँग को लेकर नियामक और राज्य सरकारें क्या नीतिगत क़दम उठाती हैं। कुल मिलाकर, 2026 भारत के “AI-infra देश” बनने की दिशा में निर्णायक साल साबित हो सकता है।
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स्रोत: Business Standard, Digitimes, Inc42, Deccan Herald, DQIndia, Light Reading (दिनांक तक की रिपोर्टिंग)।





