नई दिल्ली, 16 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): मई 2026 में PhonePe, Google Pay और Paytm — तीनों ने अपने अब तक के सबसे ऊँचे मासिक UPI ट्रांज़ैक्शन वॉल्यूम दर्ज किए, लेकिन इसी महीने तीनों दिग्गजों की संयुक्त बाज़ार हिस्सेदारी में मामूली गिरावट भी आई। PhonePe ने 1,073.5 करोड़ ट्रांज़ैक्शन (₹14.67 लाख करोड़) के साथ बढ़त बनाए रखी, पर इसकी हिस्सेदारी अप्रैल के 47.1% से घटकर 46.5% रह गई।
यह आँकड़ा भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की दो-धारी कहानी कहता है — कुल लेन-देन रिकॉर्ड ऊँचाई पर है, पर बाज़ार अब सिर्फ़ तीन बड़े नामों तक सीमित नहीं रह गया। छोटे खिलाड़ियों का उभार और NPCI की हिस्सेदारी-कैप वाली चिंता मिलकर इस सेक्टर की अगली दिशा तय करेंगे।
मई 2026 के आँकड़े: किसने कितना किया
Inc42 और Entrackr की रिपोर्टिंग के अनुसार, मई में तीनों शीर्ष ऐप्स ने मिलकर 2,000 करोड़ से ज़्यादा ट्रांज़ैक्शन प्रोसेस किए। Google Pay का मासिक वॉल्यूम 3.1% बढ़कर 735.9 करोड़ से 759.8 करोड़ हो गया, पर इसकी हिस्सेदारी 33.5% से घटकर 32.9% रह गई। Paytm ने 183.6 करोड़ ट्रांज़ैक्शन (₹1.99 लाख करोड़) किए, जो अप्रैल के 177.8 करोड़ से ज़्यादा हैं, मगर इसकी हिस्सेदारी 8.1% से फिसलकर 7.9% पर आ गई।
मूल्य (value) के लिहाज़ से PhonePe और Google Pay मिलकर मई के कुल UPI लेन-देन का क़रीब 82.6% और वॉल्यूम का लगभग 79% संभाल रहे थे। यानी रिकॉर्ड वॉल्यूम के बावजूद बाज़ार पर शीर्ष दो की पकड़ बेहद मज़बूत बनी हुई है।
छोटे खिलाड़ियों की दस्तक
सबसे दिलचस्प बदलाव नीचे की पंक्ति में है। WhatsApp Pay, MobiKwik, Kiwi, Navi और Flipkart-समर्थित super.money जैसे उभरते ऐप्स की संयुक्त हिस्सेदारी अप्रैल के 2.4% से लगभग दोगुनी होकर मई में 4.3% पहुँच गई। Navi ने अकेले 82.4 करोड़ से ज़्यादा और super.money ने 41.9 करोड़ ट्रांज़ैक्शन दर्ज किए। यह आँकड़ा बताता है कि नए खिलाड़ियों के लिए दरवाज़ा अब पहले से ज़्यादा खुला है।
UPI का सफ़र: रिकॉर्ड क्यों मायने रखता है
2016 में NPCI द्वारा शुरू किया गया UPI आज भारत का सबसे बड़ा रिटेल पेमेंट रेल बन चुका है — चाय की दुकान से लेकर बड़े रिटेल स्टोर तक, QR कोड स्कैन कर भुगतान अब रोज़मर्रा की आदत है। मई के रिकॉर्ड वॉल्यूम इसी गहराई का प्रमाण हैं: लेन-देन की संख्या लगातार बढ़ रही है, भले ही व्यक्तिगत ऐप्स की हिस्सेदारी का गणित बदल रहा हो। यही कारण है कि “सबसे ऊँचा वॉल्यूम पर घटती हिस्सेदारी” का विरोधाभास इस बाज़ार की परिपक्वता का संकेत है, संकट का नहीं।
“शीर्ष ऐप्स के पास बाज़ार हिस्सेदारी का केंद्रीकरण चिंता का विषय बना हुआ है।” — NPCI का रुख़ (छोटे UPI खिलाड़ियों के साथ अप्रैल बैठक के बाद)
इसी पृष्ठभूमि में डिजिटल गोल्ड ख़रीद जैसे संबद्ध सेगमेंट मई में लगभग सपाट रहे, जो बताता है कि उपभोक्ता खर्च का बड़ा हिस्सा अब भी रोज़मर्रा के भुगतान पर केंद्रित है, निवेश-उन्मुख लेन-देन पर नहीं।
NPCI की चिंता और 30% कैप
यह बदलाव NPCI (National Payments Corporation of India) के लिए राहत की तरह है, जो लंबे समय से शीर्ष ऐप्स के पास हिस्सेदारी के केंद्रीकरण को लेकर चिंतित रहा है। अप्रैल में पेमेंट्स बॉडी ने छोटे UPI खिलाड़ियों के साथ बैठक की थी ताकि प्रतिस्पर्धा बढ़ाई जा सके।
“किसी एक थर्ड-पार्टी ऐप के पास कुल UPI वॉल्यूम का 30% से अधिक नहीं होना चाहिए।” — NPCI का प्रस्तावित मार्केट-शेयर कैप (2020)
हालाँकि इस 30% कैप का क्रियान्वयन बार-बार टाला गया है और मौजूदा समयसीमा दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है। PhonePe और Google Pay दोनों इस सीमा से क़रीब डेढ़ गुना ऊपर हैं, इसलिए कैप लागू होने पर पूरे बाज़ार का ढाँचा बदल सकता है।
Paytm की वापसी और भारतीय एंगल
Paytm के लिए मई के आँकड़े मायने रखते हैं। Vijay Shekhar Sharma की अगुवाई वाली कंपनी पिछले कुछ तिमाहियों की नियामकीय चुनौतियों के बाद धीरे-धीरे वॉल्यूम में सुधार दिखा रही है — मासिक ट्रांज़ैक्शन और value दोनों अप्रैल के मुक़ाबले बढ़े हैं। भारतीय उपभोक्ता और छोटे व्यापारी के लिए इसका मतलब है ज़्यादा विकल्प और बेहतर सेवा-प्रतिस्पर्धा। साथ ही, NIPL (NPCI International) के ज़रिए UPI का विदेशों में विस्तार — हाल में फ़्रांस और मलेशिया जैसे बाज़ारों तक — भारतीय डिजिटल पब्लिक इन्फ़्रास्ट्रक्चर की वैश्विक पहुँच को मज़बूत कर रहा है। डिजिटल कॉमर्स में हाल की हलचल के लिए देखें — Meesho का Kirana Club अधिग्रहण।
मुख्य तथ्य
PhonePe: 1,073.5 करोड़ ट्रांज़ैक्शन, 46.5% हिस्सेदारी; Google Pay: 759.8 करोड़, 32.9%; Paytm: 183.6 करोड़, 7.9%; छोटे खिलाड़ी: 4.3% (अप्रैल में 2.4%); NPCI कैप: 30% (समयसीमा दिसंबर 2026 तक)।
आगे क्या?
अगले 30–90 दिनों में तीन चीज़ें देखने लायक़ हैं। पहला, क्या NPCI दिसंबर 2026 की समयसीमा से पहले 30% कैप पर कोई ठोस फ़ैसला लेता है — यह PhonePe और Google Pay के लिए सबसे बड़ा जोखिम है। दूसरा, क्या super.money और Navi जैसे नए ऐप्स अपनी रफ़्तार बरक़रार रख पाते हैं। तीसरा, UPI पर संभावित MDR या मॉनेटाइज़ेशन को लेकर सरकार और इंडस्ट्री के बीच चर्चा, जो पूरे इकोसिस्टम के अर्थशास्त्र को बदल सकती है।
स्रोत: Inc42, Entrackr, Business Standard, Coinlaw, Demandsage (15 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग; NPCI आँकड़ों पर आधारित)।





