सैन फ्रांसिस्को, 9 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): दुनिया की सबसे चर्चित AI कंपनी OpenAI ने सोमवार को पुष्टि की कि उसने अमेरिकी बाज़ार नियामक SEC के पास IPO के लिए गोपनीय (confidential) पेपरवर्क दाख़िल कर दिया है। ChatGPT बनाने वाली इस कंपनी की मौजूदा प्राइवेट वैल्यूएशन $852 अरब है, और बाज़ार विश्लेषक मान रहे हैं कि पब्लिक लिस्टिंग इसे $1 ट्रिलियन के पार पहुँचा सकती है।
यह फाइलिंग सिर्फ़ एक कंपनी के शेयर बाज़ार में उतरने की कहानी नहीं है। यह तय करेगी कि बीते तीन साल से चल रहे AI निवेश के बुलबुले की असली क़ीमत क्या है — और क्या निवेशक एक ऐसी कंपनी पर अरबों डॉलर लगाने को तैयार हैं जो रिकॉर्ड रेवेन्यू के बावजूद हर साल भारी घाटे में चल रही है। भारतीय IT और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए भी यह एक मानक तय करेगी।
फाइलिंग में क्या है, क्या नहीं
OpenAI ने 8 जून को जारी एक बयान में कहा कि उसने SEC के पास confidential S-1 ड्राफ़्ट जमा किया है। हालाँकि कंपनी ने साफ़ किया कि लिस्टिंग की कोई तय तारीख़ अभी नहीं है। बयान के मुताबिक़, “अभी कुछ काम ऐसे हैं जो प्राइवेट कंपनी रहते हुए करना आसान है,” लेकिन यह फाइलिंग कंपनी को ज़रूरत पड़ने पर जल्दी पब्लिक होने का विकल्प देती है।
संख्याएँ बड़ी हैं। मौजूदा $852 अरब वैल्यूएशन उस $122 अरब फंडिंग राउंड में तय हुई थी जो मार्च 2026 में बंद हुआ — जिसमें Amazon, Nvidia और SoftBank ने पैसा लगाया। रिपोर्टों के अनुसार कंपनी IPO में क़रीब $60 अरब जुटाने की योजना बना रही है, और इस डील का नेतृत्व Goldman Sachs, Morgan Stanley और JPMorgan कर रहे हैं। कई विश्लेषकों के अनुसार लिस्टिंग सितंबर से नवंबर 2026 की खिड़की में संभव है, हालाँकि कंपनी ने ख़ुद इसकी पुष्टि नहीं की है।
घाटे में मुनाफ़े की कहानी
OpenAI की रफ़्तार चौंकाने वाली है। कंपनी का सालाना (annualized) रेवेन्यू 2025 के अंत तक $20 अरब को पार कर गया और फ़रवरी 2026 तक $25 अरब तक पहुँच गया। CEO Sam Altman ने 2027 तक इसे $100 अरब पर ले जाने का लक्ष्य रखा है।
लेकिन दूसरी तरफ़ घाटा भी उतना ही बड़ा है। आंतरिक अनुमानों के मुताबिक़ कंपनी अकेले 2026 में क़रीब $14 अरब का नुक़सान उठा सकती है, और मुनाफ़े में आने से पहले कुल घाटा $44 अरब तक जा सकता है — जिसके 2029 के आसपास संतुलित होने की उम्मीद है। यही वजह है कि निवेशक उत्साह और सतर्कता, दोनों के साथ इस लिस्टिंग को देख रहे हैं।
विश्लेषक क्या कह रहे हैं
Wall Street पर इस फाइलिंग को एक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। Wedbush के एनालिस्ट Dan Ives के मुताबिक़, “IPO बाज़ार के दरवाज़े अब आधिकारिक रूप से खुल गए हैं, और इस साल तीन बड़ी AI कंपनियाँ पब्लिक होने जा रही हैं।” उनका इशारा OpenAI के साथ-साथ Anthropic और SpaceX की संभावित लिस्टिंग की ओर था।
फाइलिंग की पुष्टि करते वक़्त Altman और चीफ़ साइंटिस्ट Jakub Pachocki ने एक मिशन-स्टेटमेंट भी जारी किया, जिसका शीर्षक था “Built to benefit everyone”। इसमें कंपनी ने अपना लक्ष्य “धरती के हर इंसान को एक निजी AGI” देने का बताया। आलोचकों का कहना है कि यह दार्शनिक भाषा निवेशकों को असली सवालों — घाटे और कंप्यूट लागत — से ध्यान हटाने की कोशिश है।
भारत के निवेशक और इकोसिस्टम पर असर
भारतीय निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वे इस लिस्टिंग में हिस्सा ले पाएँगे। जवाब सीधा नहीं है — भारतीय निवेशक अमेरिकी IPO में सीधे आवेदन नहीं कर सकते, लेकिन लिस्ट होने के बाद Liberalised Remittance Scheme (LRS) के ज़रिए विदेशी शेयर ख़रीदने वाले प्लेटफ़ॉर्म पर इन्हें ख़रीदा जा सकता है।
दूसरा पहलू भारतीय बाज़ार से जुड़ा है। OpenAI ने हाल ही में “OpenAI for India” पहल शुरू की है और Tata Group के साथ सॉवरेन AI क्षमताएँ बनाने पर काम कर रही है। जून 2026 तक भारत में ChatGPT के 10 करोड़ से ज़्यादा साप्ताहिक यूज़र हैं, जो अमेरिका के बाद इसका सबसे बड़ा बाज़ार बनाता है। एक पब्लिक OpenAI पर शेयरधारकों का दबाव बढ़ेगा, जिसका सीधा असर भारत में उसकी प्राइसिंग और प्रोडक्ट रणनीति पर पड़ सकता है।
आगे क्या?
अगले 30-90 दिनों में तीन चीज़ों पर नज़र रहेगी। पहला — क्या SEC की समीक्षा के बाद कंपनी सार्वजनिक S-1 जारी करती है, जिसमें असली घाटे-मुनाफ़े के आँकड़े सामने आएँगे। दूसरा — Anthropic और xAI की प्रतिक्रिया, क्योंकि एक की लिस्टिंग बाक़ी पर भी दबाव बनाएगी। तीसरा — भारतीय ब्रोकरेज और LRS प्लेटफ़ॉर्म इस मौक़े को कैसे भुनाते हैं। तय तारीख़ की पुष्टि से पहले बाज़ार में चर्चा और सतर्कता, दोनों बने रहने की उम्मीद है।
स्रोत: 24/7 Wall St., Fortune, The Statesman, Business Standard, The Washington Post, Investing.com, Sunday Guardian (9 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।





