बेंगलुरु, 21 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): भारतीय भाषाओं पर केंद्रित AI कंपनी Sarvam ने $234 मिलियन (लगभग ₹1,950 करोड़) जुटाकर $1.5 अरब का वैल्यूएशन हासिल कर लिया है, और इसके साथ ही यह देश का नया AI यूनिकॉर्न बन गई है। राउंड की अगुवाई IT सर्विसेज़ कंपनी HCLTech ने की, जिसने अकेले $150 मिलियन लगाए हैं।
यह सौदा ऐसे समय आया है जब “सॉवरेन AI” यानी देश के अपने नियंत्रण वाले AI मॉडल और कंप्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर की बहस भारत में तेज़ है। OpenAI और Anthropic दोनों भारत को अमेरिका के बाद अपना दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बता चुके हैं, फिर भी फ्रंटियर मॉडल बनाने वाली घरेलू कंपनियाँ गिनी-चुनी हैं। Sarvam का यह राउंड उसी अंतर को पाटने की कोशिश है।
राउंड में क्या-क्या है
Sarvam का यह Series B राउंड कुल $300 मिलियन का है, जिसमें $234 मिलियन का पहला क्लोज़ पूरा हो चुका है। HCLTech लीड स्ट्रैटेजिक निवेशक के तौर पर बेंगलुरु की इस कंपनी में 10.46% हिस्सेदारी ₹1,427.25 करोड़ में ख़रीद रही है। राउंड में Bessemer Venture Partners नया निवेशक है, जबकि मौजूदा बैकर्स Khosla Ventures और Peak XV Partners ने भी हिस्सा लिया।
यह निवेश Sarvam के उन शुरुआती $41 मिलियन (सीड और Series A मिलाकर) के दो साल से ज़्यादा बाद आया है, जो कंपनी ने 2023 के अंत में जुटाए थे। इस साल की शुरुआत में Sarvam ने 30 अरब और 105 अरब पैरामीटर वाले अपने ओपन-सोर्स मॉडल भी लॉन्च किए थे, जिन्हें भारतीय भाषाओं और एंटरप्राइज़ इस्तेमाल के लिए डिज़ाइन किया गया है।
कंपनी कितनी बड़ी हो चुकी है
Sarvam अब सिर्फ़ रिसर्च लैब नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर तैनात प्लेटफ़ॉर्म है। कंपनी के मुताबिक़ इसका कन्वर्सेशनल AI प्लेटफ़ॉर्म रोज़ 20 लाख से ज़्यादा इंटरैक्शन संभालता है, जबकि इन्फ़रेंस प्लेटफ़ॉर्म रोज़ाना क़रीब 1 करोड़ API कॉल प्रोसेस करता है। इसके स्पीच मॉडल हर महीने 5 लाख घंटे से ज़्यादा ऑडियो ट्रांसक्राइब करते हैं और डॉक्युमेंट AI सिस्टम 3.5 करोड़ से ज़्यादा पन्नों को डिजिटाइज़ कर रहे हैं।
ये टूल्स अब ज़मीन पर भी पहुँच रहे हैं। कंपनी के अनुसार उसके बहुभाषी वॉइस एजेंट्स ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के लिए 1.7 करोड़ किसानों से डेटा जुटाया है, और एक बड़ी बीमा कंपनी के राष्ट्रव्यापी वॉइस कैंपेन ने 4.5 करोड़ पॉलिसीधारकों के रिन्यूअल में मदद की। एक बड़ी फिनटेक कंपनी अपने 3.5 लाख से ज़्यादा सेल्सफ़ोर्स को सपोर्ट करने के लिए Sarvam का एजेंटिक AI प्लेटफ़ॉर्म इस्तेमाल कर रही है।
संस्थापक क्या कहते हैं
Sarvam की स्थापना Vivek Raghavan और Pratyush Kumar ने की, जो पहले IIT मद्रास की भारतीय-भाषा AI पहल AI4Bharat से जुड़े थे — यह पहल टेक्नोलॉजी वेटरन नंदन नीलेकणी के समर्थन से चलती है। राघवन इससे पहले UIDAI में मुख्य बायोमेट्रिक आर्किटेक्ट रहे और आधार व UPI जैसे डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
“हमारी महत्वाकांक्षा इस टेक्नोलॉजी को भारत में व्यापक रूप से फैलाने की है।” — Vivek Raghavan, सह-संस्थापक, Sarvam
राघवन के मुताबिक़ कंपनी का लक्ष्य नागरिकों, छोटे कारोबारों, एंटरप्राइज़ और राज्य व केंद्र सरकारों — सभी के लिए मूल्य पैदा करना है। उन्होंने जोड़ा, Vivek Raghavan ने कहा, “हम उन्हें AI अपनाने और उस पर इनोवेट करने, दोनों में मदद करने की स्थिति में हैं।” HCLTech के साथ साझेदारी का इरादा Sarvam के मॉडल को HCLTech के एंटरप्राइज़ रिश्तों, इंजीनियरिंग वर्कफ़ोर्स और सॉफ़्टवेयर एसेट्स के साथ जोड़कर कारोबारों व सरकारों के लिए AI प्रोडक्ट बनाने का है।
सॉवरेन AI की बहस और भारतीय एंगल
इस फंडिंग का संदर्भ समझने के लिए पिछले हफ़्ते की घटना अहम है। Anthropic ने अपने नए मॉडल — Fable 5 और Mythos 5 — तक पहुँच तब बंद कर दी जब अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर किसी भी विदेशी नागरिक द्वारा इनके इस्तेमाल पर रोक का आदेश दिया। TechCrunch की रिपोर्ट के मुताबिक़ इस क़दम ने दिखाया कि अत्याधुनिक AI सिस्टम तक पहुँच आज भी मुट्ठीभर विदेशी प्रदाताओं के पास केंद्रित है।
यही वजह है कि घरेलू फ्रंटियर मॉडल को रणनीतिक ज़रूरत के तौर पर देखा जा रहा है। बैंकिंग, बीमा, सरकारी सेवाओं और रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात होने वाली AI के लिए विदेशी मॉडल पर निर्भरता एक जोखिम है। उद्योग विश्लेषकों के अनुसार ऊँची कंप्यूट लागत और पूँजी की सीमित उपलब्धता ने अब तक भारतीय स्टार्टअप्स के लिए अमेरिका और चीन के अच्छी तरह फंडेड प्रतिद्वंद्वियों से मुक़ाबला कठिन बनाया है।
आगे क्या?
Sarvam ने कहा है कि नई पूँजी से वह एजेंटिक, कोडिंग और साइबरसिक्योरिटी पर केंद्रित अगली पीढ़ी के AI मॉडल की रिसर्च को फंड करेगी, साथ ही कंप्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर तक पहुँच बढ़ाएगी। अगले 30-90 दिनों में तीन चीज़ों पर नज़र रहेगी: पहला, $300 मिलियन के Series B का बाक़ी हिस्सा कौन निवेशक पूरा करते हैं; दूसरा, HCLTech के साथ संयुक्त एंटरप्राइज़ प्रोडक्ट कब बाज़ार में आते हैं; और तीसरा, क्या Sarvam अपने अगले फ्रंटियर मॉडल के साथ ओपन-सोर्स रणनीति जारी रखती है। इन जवाबों से तय होगा कि भारत का सॉवरेन-AI दाँव कितनी दूर जाता है।
स्रोत: TechCrunch, Business Standard, Free Press Journal, Republic World, Bessemer Venture Partners, Sarvam.ai (15-16 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।





