बेंगलुरु, 11 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): AI-आधारित प्रिसिज़न ऑन्कोलॉजी स्टार्टअप 4baseCare ने अपनी Series B फंडिंग को ₹128 करोड़ (~$13 मिलियन) पर पूरा (close) कर लिया है। ताज़ा दौर में कंपनी ने ₹38 करोड़ (~$4 मिलियन) जुटाए, जिसकी अगुवाई growX Ventures और IT दिग्गज Infosys ने की।
यह फंडिंग ऐसे क्षेत्र में आई है जहाँ भारत की भागीदारी अब तक सीमित रही है — कैंसर के इलाज को मरीज़ के जीनोम के हिसाब से तय करने वाली प्रिसिज़न ऑन्कोलॉजी। 4baseCare का दाँव है कि जीनोमिक्स, बायोइन्फ़ॉर्मेटिक्स और AI को मिलाकर वह इस महँगी और पश्चिम-केंद्रित तकनीक को उभरते बाज़ारों तक पहुँचाएगी।
राउंड में क्या-क्या है
4baseCare की स्थापना 2019 में हितेश गोस्वामी (Hitesh Goswami) और क्षितिज ऋषि (Kshitij Rishi) ने बेंगलुरु में की थी। ₹38 करोड़ के इस टॉप-अप के साथ कंपनी की Series B अब कुल ₹128 करोड़ पर बंद हुई है। इससे पहले इसी राउंड के पहले हिस्से (first close) में कंपनी ने ₹90 करोड़ जुटाए थे, जिसमें निवेशक आशीष काचोलिया (Ashish Kacholia), लशित संघवी और Yali Capital शामिल थे। Yali Capital ने ही 2024 में कंपनी का ₹50 करोड़ का Series A दौर लीड किया था।
कंपनी का फ़्लैगशिप प्लेटफ़ॉर्म OncoTwin है, जो क्लिनिको-जीनोमिक और रियल-वर्ल्ड मरीज़ डेटा से ऑन्कोलॉजिस्ट को इलाज से जुड़े insights देता है। 4baseCare फ़िलहाल हर महीने क़रीब 1,500 जीनोमिक टेस्ट करती है, और अगले चरण में इस संख्या को 8,000–10,000 प्रति माह तक ले जाने का लक्ष्य है।
संस्थापक ने क्या कहा
सह-संस्थापक और CEO हितेश गोस्वामी ने पूँजी का इस्तेमाल वैश्विक विस्तार और प्लेटफ़ॉर्म को गहरा करने में बताया। उन्होंने कहा, “यह अतिरिक्त पूँजी हमें अपना genomics lab network वैश्विक स्तर पर बढ़ाने और OncoTwin को और scale करने में मदद करेगी, ताकि clinicians को गहरे, real-world, clinically actionable insights मिल सकें।”
गोस्वामी ने डेटा-असमानता की ओर भी इशारा किया, जो प्रिसिज़न ऑन्कोलॉजी की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है। उन्होंने कहा, “अधिकांश genomic datasets, drug discovery और clinical trials अब भी अमेरिका और यूरोप में केंद्रित हैं। हम भारत, मिडिल ईस्ट, साउथईस्ट एशिया और लैटिन अमेरिका की underrepresented आबादी के लिए समाधान बना रहे हैं।”
OncoTwin कैसे काम करता है
OncoTwin दरअसल एक “डिजिटल ट्विन” की तरह काम करता है — मरीज़ के जीनोमिक और क्लिनिकल डेटा को मिलाकर यह ऑन्कोलॉजिस्ट को बताता है कि किसी ख़ास कैंसर में कौन-सी थेरेपी कारगर रहने की संभावना है। पारंपरिक तरीक़े में यह विश्लेषण महँगा, धीमा और अक्सर विदेशी लैब्स पर निर्भर रहा है। 4baseCare का दावा है कि स्थानीय लैब नेटवर्क और AI मॉडल से वह इस प्रक्रिया को तेज़ और सस्ता बना रही है।
कंपनी का विस्तार-नक़्शा भी आक्रामक है। फ़िलहाल भारत, दुबई, नेपाल और फ़िलीपींस में लैब चलाने वाली 4baseCare का इरादा अगले 12–18 महीनों में 8–10 और देशों में उतरने का है — वही इलाक़े जहाँ कैंसर के मरीज़ तो तेज़ी से बढ़ रहे हैं, पर प्रिसिज़न-टेस्टिंग की पहुँच सीमित है। ताज़ा फंडिंग का बड़ा हिस्सा भारत, मिडिल ईस्ट, साउथईस्ट एशिया, लैटिन अमेरिका और सेंट्रल एशिया में जीनोमिक्स लैब नेटवर्क के विस्तार पर ख़र्च होगा।
पृष्ठभूमि: हेल्थटेक और AI का मेल
4baseCare की कहानी भारत के डीपटेक हेल्थकेयर की उस लहर का हिस्सा है, जहाँ AI को नैदानिक (diagnostic) फ़ैसलों में उतारा जा रहा है। Infosys की भागीदारी इस लिहाज़ से अहम है कि एक बड़ी IT सेवा कंपनी हेल्थटेक डीपटेक में सीधे निवेश कर रही है — यह संकेत है कि एंटरप्राइज़ टेक और लाइफ़ साइंसेज़ के बीच की दीवार धीरे-धीरे घट रही है।
उसी दिन (11 जून) के फंडिंग आँकड़े बताते हैं कि भारत में डीपटेक और हेल्थटेक निवेशकों की पसंद बने हुए हैं — एक ही दिन में सात राउंड दर्ज हुए, जिनमें डीपटेक मैन्युफ़ैक्चरिंग से लेकर लाइफ़ साइंसेज़ तक शामिल रहे। यह उस व्यापक रुझान की पुष्टि करता है कि भले समग्र स्टार्टअप फंडिंग सुस्त हो, गहरी तकनीक वाले क्षेत्रों में पूँजी आ रही है।
इंडस्ट्री के लिए मायने
प्रिसिज़न ऑन्कोलॉजी जैसे क्षेत्र में लागत और पहुँच सबसे बड़ी बाधा रही है। एक जीनोमिक टेस्ट की क़ीमत अब भी कई मरीज़ों की पहुँच से बाहर है, और भरोसेमंद नतीजों के लिए अक्सर सैंपल विदेश भेजने पड़ते हैं। अगर 4baseCare अपने मासिक टेस्ट वॉल्यूम को 1,500 से बढ़ाकर तय लक्ष्य तक ले जाती है, तो प्रति-टेस्ट लागत घटने और छोटे शहरों के अस्पतालों तक पहुँच बनने की ठोस संभावना है। यही “पैमाने से सस्ती सटीकता” इस मॉडल का असली इम्तिहान है।
आगे क्या? (Outlook)
अगले 30–90 दिनों में देखने लायक़ बातें: पहला, 4baseCare नए देशों में लैब-विस्तार की घोषणाएँ कब करती है; दूसरा, क्या मासिक टेस्ट वॉल्यूम 1,500 से बढ़कर तय लक्ष्य की ओर ठोस रफ़्तार पकड़ता है; और तीसरा, Infosys की रणनीतिक भागीदारी आगे चलकर एंटरप्राइज़ हेल्थकेयर सॉल्यूशंस में किसी बड़े तालमेल का रूप लेती है या नहीं। इन्हीं से तय होगा कि भारतीय प्रिसिज़न ऑन्कोलॉजी वैश्विक मंच पर कितनी जगह बना पाती है।
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स्रोत: Entrackr, Analytics Insight, BioSpectrum India, Digital Health News, StartupTalky (रिपोर्टिंग तिथि तक)।





