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Rekise Marine ने जुटाए $9.7M, Accel-NKSquared की अगुवाई

On: June 19, 2026 9:47 AM
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Rekise Marine Jalkapi AUV - IT Samachar
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बेंगलुरु, 19 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): समुद्री रोबोटिक्स में काम करने वाली बेंगलुरु की डीप-टेक स्टार्टअप Rekise Marine ने $9.7 मिलियन (क़रीब ₹81 करोड़) का सीड फ़ंड जुटाया है। इस राउंड की अगुवाई Accel और निखिल कामथ की निवेश फ़र्म NKSquared ने मिलकर की है। कंपनी इस पूँजी से भारतीय नौसेना के लिए स्वायत्त (autonomous) पानी के नीचे चलने वाले वाहन तैयार कर रही है।

यह फ़ंडिंग ऐसे समय आई है जब भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्वदेशी डीप-टेक पर ज़ोर दे रहा है। समुद्री सुरक्षा और निगरानी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में autonomous सिस्टम की माँग तेज़ी से बढ़ रही है, और Rekise इसी अंतर को भरने की कोशिश कर रही है।

राउंड में कौन-कौन शामिल

$9.7 मिलियन के इस सीड राउंड में मुख्य निवेशकों Accel और NKSquared के अलावा कई जाने-माने नाम जुड़े हैं — Sameer Brij Verma, Sandeep Singhal, Industrial47 और Singularity AMC के साथ-साथ कंपनी के संस्थापक और कई फ़ैमिली ऑफ़िस। एक शुरुआती चरण की डीप-टेक कंपनी के लिए यह राउंड का आकार उल्लेखनीय है, क्योंकि भारत में हार्डवेयर-इंटेंसिव रक्षा स्टार्टअप्स को बड़ी पूँजी जुटाने में आमतौर पर मुश्किल आती है।

कंपनी और उसका फ़्लैगशिप Jalkapi

Rekise Marine की स्थापना 2017 में Maitrai Maka और रिटायर्ड रियर एडमिरल Shekhar Mital ने की थी। कंपनी autonomous जहाज़, पनडुब्बियाँ और उन्नत समुद्री रोबोटिक्स सिस्टम बनाती है। इसका सबसे चर्चित प्लेटफ़ॉर्म है Jalkapi — जिसे कंपनी भारत का पहला extra-large autonomous underwater vehicle (XL-AUV) बताती है।

Jalkapi को भारतीय नौसेना के iDEX ADITI कार्यक्रम के तहत विकसित किया जा रहा है और इसे रक्षा, तटरक्षक तथा वाणिज्यिक समुद्री अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन किया गया है।

संस्थापक का नज़रिया

कंपनी का ज़ोर पूरे सिस्टम को एक इकाई की तरह डिज़ाइन करने पर है — वाहन, उसके सेंसर और सॉफ़्टवेयर अलग-अलग जोड़ने के बजाय एक साथ बनाए जाते हैं।

“At sea the autonomy is only as good as the sensors and hardware feeding it.” — Maitrai Maka, Founder & CEO, Rekise Marine

Maka के अनुसार, इसी सोच को दोहराने योग्य बनाने वाली चीज़ है टीम।

“This round lets us grow the team while putting Jalkapi in the water.” — Maitrai Maka, Founder & CEO, Rekise Marine

फ़ंड का इस्तेमाल कहाँ

कंपनी के मुताबिक़ नई पूँजी मुख्य रूप से Jalkapi के विकास को पूरा करने और समुद्री परीक्षण (sea trials) में लगेगी। इसके अलावा Rekise अपने प्रोप्राइटरी autonomy सॉफ़्टवेयर को मज़बूत करेगी और इंजीनियरिंग टीम का बड़ा विस्तार करेगी। हार्डवेयर और सॉफ़्टवेयर को एक साथ बनाने वाले इस मॉडल के लिए कुशल इंजीनियरों की भर्ती सबसे अहम चुनौती मानी जा रही है।

भारतीय डीप-टेक के लिए मायने

Rekise की फ़ंडिंग भारतीय वेंचर कैपिटल के बदलते रुझान का संकेत है, जहाँ निवेशक अब सिर्फ़ कंज़्यूमर ऐप्स नहीं, बल्कि रक्षा और डीप-टेक जैसे कठिन क्षेत्रों में भी पैसा लगा रहे हैं। Accel जैसी बड़ी फ़र्म और निखिल कामथ की NKSquared का इस सेक्टर में आना दर्शाता है कि मरीन रोबोटिक्स अब निवेशकों के रडार पर है। iDEX जैसे सरकारी कार्यक्रमों के साथ जुड़ाव स्टार्टअप्स को शुरुआती ग्राहक और भरोसेमंद राजस्व का रास्ता भी देता है।

हाल के वर्षों में भारत autonomous underwater vehicles और समुद्री निगरानी तकनीक में आयात पर निर्भरता घटाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि हिंद महासागर में रणनीतिक गतिविधियाँ तेज़ हुई हैं। ऐसे में Jalkapi जैसे स्वदेशी XL-AUV का सफल होना सिर्फ़ एक स्टार्टअप की कामयाबी नहीं, बल्कि देश की रक्षा-तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी हिस्सा बनेगा। डीप-टेक निवेशकों का कहना है कि हार्डवेयर-केंद्रित कंपनियों को नतीजे देने में समय लगता है, इसलिए धैर्यवान पूँजी इस सेक्टर की सबसे बड़ी ज़रूरत है।

मुख्य तथ्य

  • राउंड: $9.7 मिलियन सीड, सह-अगुवाई Accel व NKSquared
  • स्थापना: 2017, बेंगलुरु; संस्थापक Maitrai Maka व रिटायर्ड रियर एडमिरल Shekhar Mital
  • फ़्लैगशिप: Jalkapi — भारत का पहला XL-AUV, iDEX ADITI के तहत
  • उपयोग: Jalkapi का विकास व sea trials, autonomy सॉफ़्टवेयर, टीम विस्तार

वैश्विक स्तर पर भी रक्षा और वाणिज्यिक समुद्री क्षेत्रों में autonomous underwater vehicles की माँग तेज़ी से बढ़ रही है, और कई देश इस तकनीक में भारी निवेश कर रहे हैं। ऐसे में एक भारतीय स्टार्टअप का इस दौड़ में शामिल होना देश के लिए रणनीतिक रूप से अहम है, क्योंकि यह तकनीक संवेदनशील है और इसे आयात करना हमेशा आसान नहीं होता।

आगे क्या?

आने वाले महीनों में सबसे बड़ी कसौटी होगी Jalkapi के sea trials का नतीजा — क्योंकि समुद्र में autonomous सिस्टम को साबित करना लैब से कहीं ज़्यादा कठिन होता है। दूसरा, क्या नौसेना के साथ iDEX अनुबंध बड़े ऑर्डर में बदलते हैं। तीसरा, इंजीनियरिंग टीम का तेज़ विस्तार कंपनी की डिलीवरी रफ़्तार तय करेगा। अगले 6–12 महीनों में ये तीनों मोर्चे Rekise के भविष्य की दिशा साफ़ करेंगे।

स्रोत: Business Standard, YourStory, Entrackr, Inc42, Analytics India Magazine, SiliconIndia (19 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।

Ganesh Thik

गणेश ठीक IT Samachar के संस्थापक एवं मुख्य लेखक हैं। IT Samachar के माध्यम से वे IT इंडस्ट्री से जुड़ी ताज़ा खबरें, कंपनी अपडेट्स, layoffs, AI और मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स पर विश्वसनीय जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराते हैं।

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