बेंगलुरु, 16 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): Tata Digital की मालिकाना वाली ऑनलाइन ग्रॉसरी कंपनी BigBasket ने Amazon के पूर्व अधिकारी अमित नंदा (Amit Nanda) को अपना नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। सह-संस्थापक हरि मेनन (Hari Menon), जो अब तक कंपनी के CEO थे, इस भूमिका से हटकर बोर्ड और मेंटरशिप की ज़िम्मेदारी संभालेंगे।
यह बदलाव ऐसे समय आया है जब भारत का क्विक-कॉमर्स बाज़ार Blinkit, Zepto और Instamart के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा है और BigBasket की ग्रोथ धीमी पड़ी है। नेतृत्व परिवर्तन को कंपनी के अगले विकास-चरण और प्रॉफ़िटेबिलिटी की ओर बढ़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
क्या बदला: मेनन और पारेख की नई भूमिका
BigBasket के बयान के अनुसार, दूसरे सह-संस्थापक विपुल पारेख (Vipul Parekh), जो अब तक मार्केटिंग और फ़ाइनेंस देखते थे, भी रोज़मर्रा के परिचालन से हटकर बोर्ड में बने रहेंगे। दोनों संस्थापक नई लीडरशिप टीम को मेंटर करेंगे। कंपनी की स्थापना 2011 में हुई थी और यह 2021 में Tata Digital के अधीन आई।
नंदा, IIM अहमदाबाद के पूर्व छात्र हैं और उनके पास ई-कॉमर्स, कंज़्यूमर गुड्स तथा कंज़्यूमर बैंकिंग में दो दशक से ज़्यादा का अनुभव है। वे Amazon India में 11 साल तक रहे, जहाँ उन्होंने Director, Selling Partner Services के रूप में थर्ड-पार्टी मार्केटप्लेस इकोसिस्टम की कमान संभाली और कंपनी के प्राइवेट-लेबल पोर्टफ़ोलियो को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।
नंदा और Tata Digital ने क्या कहा
नई भूमिका पर अमित नंदा ने कहा, “मैं bigbasket से जुड़कर बेहद उत्साहित हूँ” और जोड़ा कि कंपनी के “powerhouse private labels” और Tata Group की विरासत मिलकर भविष्य के लिए मज़बूत आधार बनाते हैं। उन्होंने हरि मेनन और टीम की बनाई कंपनी के लिए “deep admiration” जताते हुए कहा कि वे सामने मौजूद “massive growth opportunities” को पकड़ने के लिए पूरी लीडरशिप टीम के साथ मिलकर काम करेंगे।
Tata Digital के CEO सजित सिवानंदन (Sajith Sivanandan) ने नंदा का स्वागत करते हुए कहा, “बड़े पैमाने के कारोबार चलाने और प्रोडक्ट व टेक्नोलॉजी रणनीति को आगे बढ़ाने का उनका अनुभव” उन्हें bigbasket का नेतृत्व करने के लिए एक उपयुक्त विकल्प बनाता है। सिवानंदन के मुताबिक़ नंदा की डिजिटल कॉमर्स और कंज़्यूमर बिहेवियर की गहरी समझ कंपनी के लिए मूल्यवान साबित होगी।
पृष्ठभूमि: धीमी ग्रोथ और बढ़ता घाटा
BigBasket का यह नेतृत्व बदलाव ऐसे दौर में हो रहा है जब कंपनी क्विक-कॉमर्स की ओर तेज़ी से रुख़ कर रही है, लेकिन रास्ता आसान नहीं रहा। उपलब्ध आँकड़ों के अनुसार FY24 में कंपनी का रेवेन्यू लगभग ₹10,100 करोड़ ($1.2 अरब) रहा, जबकि शुद्ध घाटा क़रीब ₹1,415 करोड़ ($170 मिलियन) दर्ज किया गया। 10-15 मिनट की डिलीवरी वाले मॉडल में Blinkit और Zepto जैसे प्रतिद्वंद्वियों ने आक्रामक विस्तार किया है, जिससे स्थापित प्लेयर्स पर दबाव बढ़ा है।
महीनों से चर्चा थी कि संस्थापक Tata Digital के साथ परिचालन भूमिकाओं से पीछे हटने पर बातचीत कर रहे हैं। उस समय मेनन ने नए CEO की तलाश की ख़बरों को सार्वजनिक रूप से ख़ारिज किया था। अब औपचारिक घोषणा से उस अनिश्चितता पर विराम लग गया है।
भारतीय बाज़ार के लिए मायने
क्विक-कॉमर्स भारत के सबसे तेज़ी से बढ़ते डिजिटल-कॉमर्स सेगमेंट में से एक है, और इसमें टॉप टैलेंट की मांग ऊँची है। Amazon जैसे ग्लोबल मार्केटप्लेस से अनुभवी अधिकारी को लाना यह संकेत देता है कि Tata Digital, BigBasket को प्रॉडक्ट-लेड और टेक्नोलॉजी-केंद्रित संगठन के रूप में दोबारा खड़ा करना चाहता है। उद्योग पर्यवेक्षकों के अनुसार, आने वाली तिमाहियों में असली परीक्षा यूनिट इकोनॉमिक्स सुधारने और डिलीवरी नेटवर्क को घाटे के बिना स्केल करने की होगी।
BigBasket पिछले कुछ समय से अपने ब्रांड को “BB Now” (तेज़ डिलीवरी) और “BB Daily” (सब्सक्रिप्शन-आधारित डेली डिलीवरी) जैसे फ़ॉर्मैट के साथ नए सिरे से पेश कर रहा है, ताकि वह सिर्फ़ हफ़्तावार ग्रॉसरी ऑर्डर तक सीमित न रहे। Tata Digital ने इसे अपने Tata Neu सुपर-ऐप इकोसिस्टम का अहम हिस्सा बनाया है, जहाँ ग्रॉसरी एक उच्च-फ़्रीक्वेंसी कैटेगरी के रूप में यूज़र-इंगेजमेंट बढ़ाने का काम करती है। ऐसे में नए CEO के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे तेज़ डिलीवरी की महँगी लड़ाई और लंबी अवधि की प्रॉफ़िटेबिलिटी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।
आगे क्या? (Outlook)
अगले 30-90 दिनों में तीन चीज़ें देखने लायक़ होंगी। पहला, क्या नंदा क्विक-कॉमर्स विस्तार की रफ़्तार तेज़ करते हैं या प्रॉफ़िटेबिलिटी को प्राथमिकता देते हैं। दूसरा, क्या कंपनी अपने प्राइवेट-लेबल ब्रांड्स को आगे बढ़ाकर मार्जिन सुधारती है। और तीसरा, Tata Digital की व्यापक सुपर-ऐप रणनीति में BigBasket की भूमिका कैसे आकार लेती है। विश्लेषकों के मुताबिक़ क्विक-कॉमर्स में डार्क-स्टोर नेटवर्क का घनत्व और औसत ऑर्डर वैल्यू ही तय करते हैं कि कोई प्लेयर मुनाफ़े की ओर बढ़ पाएगा या नहीं। नेतृत्व की निरंतरता बोर्ड में बने रहने वाले दोनों संस्थापक सुनिश्चित करेंगे, पर दिशा अब नए CEO के हाथ में है।
मुख्य तथ्य
नए CEO: अमित नंदा (पूर्व Amazon India, IIM-A)। पूर्व CEO व सह-संस्थापक हरि मेनन और सह-संस्थापक विपुल पारेख — अब बोर्ड व मेंटर। मालिक: Tata Digital (2021 से)। स्थापना: 2011। FY24 रेवेन्यू: ₹10,100 करोड़; शुद्ध घाटा: ₹1,415 करोड़। प्रमुख प्रतिद्वंद्वी: Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart।
स्रोत: Inc42, YourStory, Business Standard, BusinessToday, Free Press Journal, BestMediaInfo (16 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।





