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H-1B वीज़ा फ़ीस रद्द, TCS-Infosys को बड़ी राहत

On: June 10, 2026 1:25 AM
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H-1B वीज़ा फ़ीस रद्द - IT Samachar
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बेंगलुरु/बॉस्टन, 9 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): अमेरिका की एक संघीय अदालत ने नए H-1B वीज़ा पर लगाए गए $100,000 (करीब ₹83 लाख) के शुल्क को रद्द कर दिया है, जिससे TCS, Infosys, Wipro, HCLTech और Tech Mahindra जैसी भारतीय IT सर्विसेज़ कंपनियों के सिर से एक बड़ा लागत-जोखिम टल गया है। बॉस्टन के जज Leo Sorokin ने सोमवार को 42 पेज के फ़ैसले में इस शुल्क को असंवैधानिक “टैक्स” बताते हुए राष्ट्रीय स्तर पर निरस्त कर दिया।

यह फ़ैसला भारतीय IT उद्योग के लिए राहत की साँस है, क्योंकि H-1B वीज़ा वही रास्ता है जिससे ये कंपनियाँ अमेरिका में ऊँचे-मूल्य वाले प्रोजेक्ट्स पर अपने इंजीनियर तैनात करती हैं। शुल्क लागू रहता तो ऑनसाइट डिलिवरी महँगी पड़ती, मार्जिन पर दबाव आता और काम ज़्यादा भारत से (ऑफ़शोर) कराने की मजबूरी बनती।

अदालत ने क्या कहा और मामला क्या था

जज Leo Sorokin ने अपने फ़ैसले में दो-टूक लिखा, “…the Court finds that the Policy imposes a tax on H-1B petitions without the requisite delegation…” — यानी यह नीति अमेरिकी संसद की मंज़ूरी के बिना H-1B याचिकाओं पर टैक्स थोप रही थी। Leo Sorokin (US District Judge, बॉस्टन) के मुताबिक़ ऐसा कर लगाने का अधिकार सिर्फ़ अमेरिकी संसद के पास है, कार्यपालिका के पास नहीं।

यह शुल्क राष्ट्रपति Donald Trump ने सितंबर 2025 में घोषित किया था, ताकि विदेशी कर्मचारियों की भर्ती हतोत्साहित हो और कंपनियाँ स्थानीय अमेरिकियों को नौकरी दें। इसके ख़िलाफ़ 20 राज्यों के अटॉर्नी जनरल अदालत पहुँचे थे। उनकी दलील थी कि वीज़ा लागत — जो पहले महज़ $960 से $7,595 के बीच थी — इतनी बढ़ने से स्कूल, विश्वविद्यालय और सार्वजनिक स्वास्थ्य तंत्र में स्टाफ़ की भारी कमी हो जाती। समाचार रिपोर्टों के अनुसार शुल्क सितंबर 2026 तक प्रभावी रहने वाला था।

भारतीय IT पर असर क्यों बड़ा है

भारत की टॉप IT कंपनियाँ अमेरिकी राजस्व पर बहुत हद तक निर्भर हैं, और उनका कारोबारी मॉडल ऑफ़शोर (भारत से) और ऑनसाइट (अमेरिका में) काम के मिले-जुले ढाँचे पर टिका है। $100,000 का सालाना शुल्क इस संतुलन को बिगाड़ देता। Upstox की रिपोर्ट के अनुसार, शुल्क रद्द होने से यह लागत-जोखिम हट गया है और मौजूदा डिलिवरी मॉडल बरक़रार रहेगा, जो इन कंपनियों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का आधार है।

यह राहत ऐसे वक़्त आई है जब भारतीय IT शेयर पहले से दबाव में हैं। NIFTY IT इंडेक्स पिछले छह महीनों में क़रीब 25% टूट चुका है — कमज़ोर वैश्विक माँग, सतर्क क्लाइंट ख़र्च और AI से कारोबार में उथल-पुथल की आशंका इसकी वजहें रही हैं।

मुख्य तथ्य

शुल्क: $100,000 सालाना (पहले $960–$7,595)। फ़ैसला: 42 पेज, बॉस्टन, जज Leo Sorokin। याचिकाकर्ता: 20 राज्यों के अटॉर्नी जनरल। घोषणा: सितंबर 2025। प्रभावित: TCS, Infosys, Wipro, HCLTech, Tech Mahindra। NIFTY IT: 6 महीनों में ~25% गिरावट।

याद रहे, H-1B अमेरिका के सबसे अहम वर्क-वीज़ा रास्तों में से एक है, जिसके ज़रिए अमेरिकी कंपनियाँ कुशल विदेशी पेशेवर — ख़ासकर बड़ी संख्या में भारतीय इंजीनियर — को नौकरी पर रखती हैं। प्रस्तावित शुल्क का मक़सद कंपनियों को विदेशी प्रतिभा के बजाय स्थानीय कर्मचारी रखने की ओर धकेलना था, लेकिन इससे वैश्विक टेक फ़र्मों के सामने भविष्य की वीज़ा-लागत और स्टाफ़िंग मॉडल को लेकर गहरी अनिश्चितता खड़ी हो गई थी। फ़ैसले के बाद भारतीय IT कंपनियाँ अपने ऑफ़शोर-ऑनसाइट मिश्रण को बिना किसी व्यवधान के जारी रख सकेंगी, जो उनकी लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता की रीढ़ है।

उद्योग की प्रतिक्रिया और AI का बड़ा दाँव

हाल ही में हुए Cognizant AI Forum में कंपनी के CEO Ravi Kumar S ने एजेंटिक AI से IT और बिज़नेस-प्रोसेस सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए उभरते अवसर पर भरोसा जताया। निवेशकों के बीच उन्होंने कहा कि Global 2000 कंपनियों के “एजेंटिफ़िकेशन” के दायरे में आने वाले श्रम-ख़र्च के विश्लेषण के आधार पर कुल संभावित बाज़ार (TAM) $1 ट्रिलियन से बढ़कर $5–$6 ट्रिलियन तक जा सकता है।

Ravi Kumar S (CEO, Cognizant) के अनुसार कंपनी ख़ुद को “AI Builder” के रूप में फिर से खड़ा कर रही है — हाइपरप्रोडक्टिविटी, AI के औद्योगीकरण और एंटरप्राइज़ के एजेंटिफ़िकेशन के तीन-स्तंभी रणनीति के साथ। कुल मिलाकर संकेत यह है कि वीज़ा-राहत के साथ-साथ AI-आधारित नए अवसर भी इस सेक्टर के लिए दीर्घकालिक रूप से सकारात्मक हैं।

भारत के लिए ज़मीनी मतलब

भारत के लाखों सॉफ़्टवेयर इंजीनियर और उनके परिवार सीधे H-1B पारिस्थितिकी से जुड़े हैं। शुल्क रद्द होने का मतलब है कि नए वीज़ा आवेदन फिर से पुराने, किफ़ायती शुल्क ढाँचे पर लौट सकते हैं, और कंपनियों को अपनी अमेरिकी स्टाफ़िंग योजना दोबारा बनाने की मजबूरी नहीं रहेगी। हालाँकि जानकार आगाह करते हैं कि यह राहत क़ानूनी लड़ाई का एक पड़ाव भर है — सरकार ऊपरी अदालत में अपील कर सकती है, इसलिए अनिश्चितता पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई है।

आगे क्या?

अगले 30–90 दिनों में तीन चीज़ों पर नज़र रहेगी: पहला, क्या अमेरिकी सरकार इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील दायर करती है; दूसरा, जुलाई में आने वाले Q1FY27 नतीजों में TCS-Infosys-Wipro का मैनेजमेंट वीज़ा और मार्जिन पर क्या रुख़ रखता है; और तीसरा, क्या इस राहत से बीते छह महीनों में पिटे IT शेयरों में टिकाऊ रिकवरी लौटती है या यह सिर्फ़ अल्पकालिक उछाल साबित होती है। निवेशकों के लिए असली कसौटी डील-मोमेंटम और एजेंटिक-AI से जुड़ी नई कमाई होगी।

(और पढ़ें: Nifty IT 2026 में 24% टूटा, AI डर से TCS-Infosys पर दबाव।)

स्रोत: NPR, CNN, The Washington Post, Fox News, Al Jazeera, Upstox (9 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।

Ganesh Thik

गणेश ठीक IT Samachar के संस्थापक एवं मुख्य लेखक हैं। IT Samachar के माध्यम से वे IT इंडस्ट्री से जुड़ी ताज़ा खबरें, कंपनी अपडेट्स, layoffs, AI और मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स पर विश्वसनीय जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराते हैं।

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