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SandboxAQ को $500M CHIPS अवॉर्ड, AI से चिप मटीरियल खोज

On: June 18, 2026 6:28 AM
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SandboxAQ CHIPS अवॉर्ड - IT Samachar
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पालो आल्टो, 18 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): AI और क्वांटम तकनीक की कंपनी SandboxAQ ने अमेरिकी वाणिज्य विभाग (US Department of Commerce) के CHIPS रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑफ़िस के साथ $500 मिलियन (करीब ₹4,180 करोड़) के अवॉर्ड का निश्चित समझौता किया है। इस फ़ंडिंग का मक़सद सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए ज़रूरी उन क्रिटिकल मटीरियल को विकसित करना है जिन पर अब तक विदेशी नियंत्रण रहा है।

यह सौदा सिर्फ़ एक फ़ंडिंग ख़बर नहीं है — यह दिखाता है कि चिप युद्ध अब फ़ैब्रिकेशन से आगे बढ़कर उन रसायनों और चुम्बकों तक पहुँच गया है जिनके बिना कोई चिप बन ही नहीं सकती। भारत की अपनी सेमीकंडक्टर मिशन रणनीति के लिए इसमें सीधा सबक़ है।

अवॉर्ड में क्या शामिल है

17 जून 2026 को पालो आल्टो से जारी बयान के मुताबिक़, यह फ़ंडिंग चार क्षेत्रों में नए मॉलिक्यूल और फ़ॉर्मूलेशन विकसित करने के लिए दी गई है — PFAS-मुक्त प्रोसेस केमिकल, कैटलिस्ट, रेयर-अर्थ-मुक्त मैग्नेट, और बैटरी सिस्टम। ख़ास बात यह है कि इस अवॉर्ड के बदले वाणिज्य विभाग को SandboxAQ में अल्पमत, ग़ैर-मतदान (minority, non-voting) इक्विटी हिस्सेदारी मिलेगी, साथ ही भविष्य में लाइसेंस्ड फ़ॉर्मूले पर रॉयल्टी भी — जो संघीय R&D अनुदान का एक असामान्य ढाँचा है।

तकनीक: ReAQT और LQMs

चारों कार्यक्रमों की बुनियाद SandboxAQ का AI सिमुलेशन प्लेटफ़ॉर्म ReAQT है। यह प्लेटफ़ॉर्म Density Functional Theory और Molecular Dynamics जैसी हाई-फ़िडेलिटी सिमुलेशन से अपना भौतिकी-आधारित ट्रेनिंग डेटा ख़ुद बनाता है, फिर उस पर कंपनी के Large Quantitative Models (LQMs) को ट्रेन करता है। LQMs आम भाषा-आधारित AI से अलग हैं — ये भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान के नियमों पर सीखते हैं। कंपनी का दावा है कि उसका AQCat वर्कफ़्लो, जो NVIDIA के साथ मिलकर बनाए गए 1.35 करोड़ क्वांटम-केमिस्ट्री कैलकुलेशन पर आधारित है, कैटलिस्ट उम्मीदवारों की जाँच पारंपरिक तरीक़ों से 20,000 गुना तेज़ करता है।

अधिकारियों ने क्या कहा

वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक (Howard Lutnick) ने इसे आपूर्ति-श्रृंखला सुरक्षा से जोड़ा।

“यह अवॉर्ड क्रिटिकल मटीरियल की खोज और नवाचार को तेज़ करेगा और विदेशी-नियंत्रित मटीरियल पर हमारी निर्भरता घटाएगा।” — Howard Lutnick, अमेरिकी वाणिज्य सचिव

SandboxAQ के CEO जैक हिदारी (Jack Hidary) ने मटीरियल पर नियंत्रण को रणनीतिक बताया।

“अमेरिका का सेमीकंडक्टर भविष्य सुरक्षित करने का मतलब उन मटीरियल पर नियंत्रण है जो इस अहम क्षेत्र को चलाते हैं।” — Jack Hidary, CEO, SandboxAQ

कंपनी के इंजीनियरिंग उपाध्यक्ष डॉ. स्टेफ़न लाइशेनाउर (Dr. Stefan Leichenauer) ने ReAQT की तकनीकी बढ़त समझाई।

“सबसे सटीक सिमुलेशन तरीक़े इतने धीमे हैं कि बड़े पैमाने पर मटीरियल खोज नहीं सकते; केवल मौजूदा डेटा पर ट्रेन मॉडल तेज़ तो हैं पर नए मटीरियल पर टूट जाते हैं। ReAQT दोनों समस्याएँ हल करता है।” — Dr. Stefan Leichenauer, VP Engineering, SandboxAQ

पृष्ठभूमि: चीन और रेयर-अर्थ

इस अवॉर्ड की सबसे बड़ी प्रेरणा भू-राजनीति है। कंपनी के मुताबिक़, चीन दुनिया के 90% से अधिक नियोडिमियम-आधारित स्थायी मैग्नेट उत्पादन को नियंत्रित करता है, और ये मैग्नेट हर उन्नत चिप-प्रिंटिंग मशीन, वैक्यूम पंप और precision actuator के भीतर होते हैं। इसी तरह PFAS यानी “फ़ॉरएवर केमिकल्स” चिप निर्माण में हीट-ट्रांसफ़र फ़्लूइड और कोटिंग के रूप में इस्तेमाल होते हैं, पर उनके अनुपालन-योग्य विकल्प बड़े पैमाने पर अभी मौजूद नहीं हैं। SandboxAQ को T. Rowe Price, Google, IQT, Eric Schmidt, Marc Benioff और Ray Dalio जैसे निवेशकों का समर्थन प्राप्त है।

भारतीय angle

भारत के लिए यह कहानी एक चेतावनी और अवसर दोनों है। अमेरिका जिस तरह AI-संचालित मटीरियल रिसर्च में सीधे $500 मिलियन झोंक रहा है, वह दिखाता है कि सेमीकंडक्टर आत्मनिर्भरता सिर्फ़ फ़ैब बनाने तक सीमित नहीं है। India Semiconductor Mission के तहत अब तक 12 से अधिक परियोजनाएँ मंज़ूर हो चुकी हैं और बजट 2026-27 में ₹8,000 करोड़ का आवंटन हुआ है, लेकिन भारत का ध्यान मुख्यतः फ़ैब और ATMP/पैकेजिंग पर है — मटीरियल और रसायन की आपूर्ति-श्रृंखला पर नहीं। एक उद्योग विश्लेषक के अनुसार, चिप मटीरियल में रेयर-अर्थ और विशेष रसायनों के लिए चीन पर निर्भरता वैश्विक जोख़िम है, और AI-संचालित मटीरियल डिस्कवरी ही वह क्षेत्र है जहाँ भारत को अपनी रिसर्च क्षमता बढ़ानी होगी, वरना फ़ैब बनने के बाद भी आयातित इनपुट पर निर्भरता बनी रहेगी।

क्यों मटीरियल ही असली मोर्चा है

सेमीकंडक्टर बहस अक्सर नैनोमीटर नोड्स और फ़ैब्रिकेशन तक सिमट जाती है, लेकिन हर चिप के पीछे सैकड़ों विशेष रसायन, गैस, कैटलिस्ट और मटीरियल होते हैं जिनकी आपूर्ति-श्रृंखला कुछ ही देशों में केंद्रित है। SandboxAQ का दावा है कि AI-संचालित सिमुलेशन से वह काम, जो प्रयोगशाला में दशकों की ट्रायल-एंड-एरर माँगता, अब महीनों के लक्षित अभियान में सिमट सकता है। यदि यह तरीक़ा कारगर रहा, तो मटीरियल डिस्कवरी उसी तरह AI से बदल जाएगी जैसे ड्रग डिस्कवरी बदली — और यही वह क्षेत्र है जहाँ शोध-क्षमता वाले देश बढ़त ले सकते हैं, बिना अरबों डॉलर के फ़ैब बनाए।

आगे क्या? (Outlook)

अगले 30-90 दिनों में तीन चीज़ें अहम रहेंगी। पहला, SandboxAQ अपने अमेरिकी मैन्युफ़ैक्चरिंग पार्टनर्स की घोषणा कब करता है, जो लैब नतीजों को व्यावसायिक उत्पादन में बदलेंगे। दूसरा, सरकार के इक्विटी-स्टेक मॉडल को लेकर बहस — क्या यह अन्य CHIPS अवॉर्ड का टेम्पलेट बनेगा। तीसरा, क्या भारत की ISM 2.0 रणनीति मटीरियल और रसायन रिसर्च को भी अपने दायरे में लाती है। सेमीकंडक्टर की अगली होड़ अब सिलिकॉन पर नहीं, उसके भीतर के अणुओं पर लड़ी जाएगी।

स्रोत: SandboxAQ (आधिकारिक प्रेस रिलीज़), NIST, PR Newswire, HPCwire, The Quantum Insider, Domain-b (18 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।

Ganesh Thik

गणेश ठीक IT Samachar के संस्थापक एवं मुख्य लेखक हैं। IT Samachar के माध्यम से वे IT इंडस्ट्री से जुड़ी ताज़ा खबरें, कंपनी अपडेट्स, layoffs, AI और मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स पर विश्वसनीय जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराते हैं।

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