मुंबई, 9 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): क्विक-कॉमर्स कंपनी Zepto ने SEBI के पास अपडेटेड draft red herring prospectus (DRHP) दाख़िल कर दिया है, जिसमें ₹8,010 करोड़ के fresh issue के साथ मौजूदा निवेशकों की बड़ी offer-for-sale (OFS) शामिल है। यह भारत के तेज़ी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स सेक्टर की पहली शुद्ध pure-play कंपनी होगी जो घरेलू एक्सचेंजों पर लिस्ट होने जा रही है।
यह फ़ाइलिंग सिर्फ़ एक और IPO नहीं है। टेक्नोलॉजी और cloud infrastructure पर भारी ख़र्च, करोड़ों यूज़र्स तक स्केल और साथ-साथ बढ़ते घाटे — Zepto का DRHP भारतीय startup इकोसिस्टम के सामने वही बुनियादी सवाल रखता है: तेज़ ग्रोथ और मुनाफ़े के बीच संतुलन कब बनेगा। निवेशकों, कर्मचारियों और प्रतिद्वंद्वियों के लिए यह लिस्टिंग एक बेंचमार्क बनेगी।
IPO का ढाँचा और निवेशक
IPO में ₹8,010 करोड़ तक का fresh issue और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 11.34 करोड़ से ज़्यादा equity shares की OFS शामिल है। OFS में हिस्सा लेने वाले प्रमुख निवेशकों में Nexus Venture इकाइयाँ, Contrary Capital-लिंक्ड इकाइयाँ, Razor-समर्थित फ़ंड और Kaiser-लिंक्ड संस्थागत निवेशक शामिल हैं। अहम बात यह है कि सह-संस्थापक Aadit Palicha और Kaivalya Vohra, उनसे जुड़े family trusts के साथ, इस IPO में एक भी शेयर नहीं बेचेंगे।
IPO को book running lead managers के एक consortium ने संभाला है, जिसमें Motilal Oswal, Morgan Stanley India, Goldman Sachs (India), JM Financial, IIFL Capital, HSBC Securities और Axis Capital शामिल हैं।
रेवेन्यू दोगुना, घाटा भी चौड़ा
Zepto के आँकड़े तेज़ स्केल-अप दिखाते हैं। कंपनी का operating revenue FY26 में ₹22,623.6 करोड़ रहा, जो FY25 के ₹11,109.9 करोड़ और FY24 के ₹4,454.5 करोड़ से कहीं ऊपर है। लेकिन यह ग्रोथ बढ़ते घाटे के साथ आई — net loss FY26 में ₹5,905.2 करोड़ तक पहुँच गया, जो FY25 में ₹4,699.7 करोड़ था। कुल ख़र्च ₹29,026.7 करोड़ रहा, जिसमें procurement सबसे बड़ा हिस्सा था।
DRHP में दिए गए जोख़िम कारकों में संस्थापकों को जारी ED (Enforcement Directorate) समन, उपभोक्ता संरक्षण शिकायतें, श्रम-संबंधी मामले और कुछ स्थानों पर food safety compliance के मुद्दे शामिल हैं।
पैसा कहाँ लगेगा
Fresh issue की बड़ी रकम dark store नेटवर्क के विस्तार में जाएगी — कंपनी ने FY30 तक क़रीब 1,900 नए dark stores खोलने के लिए फ़ंड आवंटित किए हैं, साथ ही मौजूदा इन्फ़्रास्ट्रक्चर के lease भुगतान के लिए भी। टेक्नोलॉजी और cloud infrastructure एक और प्रमुख क्षेत्र है, जिसमें प्लेटफ़ॉर्म मज़बूत करने और स्केलिंग के लिए ₹1,300 करोड़ से ज़्यादा रखे गए हैं। बाक़ी रक़म marketing, संभावित acquisitions और general corporate purposes में लगेगी।
कंपनी का कहना है कि ये निवेश margins सुधारने और एक बेहद प्रतिस्पर्धी बाज़ार में दीर्घकालिक ग्रोथ बनाए रखने के लिए हैं। सह-संस्थापक Aadit Palicha ने पहले एक बयान में कारोबार की दिशा पर भरोसा जताया था।
“The business is fundamentally improving — and this is just the beginning.” — Aadit Palicha, सह-संस्थापक, Zepto
Palicha ने FY26 के नतीजों के हवाले से बताया था कि per-order adjusted EBITDA घाटा लगभग आधा हो गया और cost per order तथा free cash flow घाटे में भी बड़ी गिरावट आई। IPO की तैयारी पर उन्होंने पहले कहा था:
“From an IPO readiness perspective, we are there right now.” — Aadit Palicha, सह-संस्थापक, Zepto
कंपनी के मुताबिक़ उसके पास क़रीब $900 मिलियन का net cash है, जिससे वह भविष्य के लिए “well-capitalised” है।
क्विक-कॉमर्स की होड़ और भारतीय angle
Zepto भारत के भीड़भाड़ वाले क्विक-कॉमर्स बाज़ार में Blinkit, Instamart, Amazon Now, Flipkart Minutes, BigBasket और JioMart जैसी कंपनियों से मुक़ाबला करती है। इस IPO के साथ कंपनी ख़ुद को लिस्टेड स्पेस में pure-play क्विक-कॉमर्स की अगुआ के रूप में पेश कर रही है — भले ही स्केल की दौड़ में अभी भारी घाटा झेल रही हो।
भारतीय tech-IPO इकोसिस्टम के लिहाज़ से यह एक अहम परीक्षा है। OpenAI और SpaceX जैसी ग्लोबल फ़ाइलिंग्स के बीच Zepto की लिस्टिंग यह जाँचेगी कि घरेलू निवेशक “ग्रोथ बनाम मुनाफ़ा” वाली consumer-tech कहानियों को किस वैल्यूएशन पर स्वीकार करते हैं। संस्थापकों का OFS में शेयर न बेचना और domestic shareholding बढ़ाने पर ज़ोर इस संकेत को मज़बूत करता है कि कंपनी लंबी पारी खेलने की तैयारी में है।
आगे क्या?
अब नज़र SEBI की मंज़ूरी प्रक्रिया और price band पर रहेगी, जो वैल्यूएशन की असली तस्वीर साफ़ करेगी। दूसरा, FY27 के पहले तिमाही नतीजों में EBITDA घाटे का रास्ता मुनाफ़े की ओर कितना मुड़ता है, यह निवेशक धारणा तय करेगा। तीसरा, ED समन और regulatory जोख़िमों पर कोई भी अपडेट लिस्टिंग टाइमलाइन को प्रभावित कर सकता है। अगले 30-90 दिनों में इन तीनों मोर्चों की हलचल भारत के क्विक-कॉमर्स IPO अध्याय की दिशा तय करेगी।
स्रोत: Outlook Business, Groww, Dhan, Univest, Yahoo Finance, Inc42 (9 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।





