बेंगलुरु, 21 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): 15 मिनट में EV फ़ुल-चार्ज करने वाली बेंगलुरु की डीप-टेक कंपनी Exponent Energy ने ₹200 करोड़ (क़रीब $21.1 मिलियन) जुटाए हैं। Series B2 राउंड की सह-अगुवाई 360 ONE Asset और TDK Ventures ने की, और इसके साथ कंपनी की कुल फ़ंडिंग $65.7 मिलियन पर पहुँच गई है।
यह सौदा भारत के कमर्शियल EV सेगमेंट के लिए अहम है, जहाँ चार्जिंग में लगने वाला समय अब भी सबसे बड़ी रुकावट है। Exponent का दावा है कि उसकी एनर्जी स्टैक तकनीक स्टैंडर्ड लिथियम-आयन सेल से ही 15 मिनट में पूरी चार्जिंग देती है — यही इसे फ़्लीट ऑपरेटरों के लिए आकर्षक बनाता है।
राउंड में कौन-कौन
₹200 करोड़ के इस Series B2 राउंड की सह-अगुवाई 360 ONE Asset और TDK Ventures ने की, जबकि इसमें Hitachi Ventures भी शामिल हुई। मौजूदा निवेशकों Eight Roads Ventures, Lightspeed, 3one4 Capital, AdvantEdge VC और YourNest ने भी हिस्सा लिया। ख़ास बात यह कि एंट्रैकर की रिपोर्ट के मुताबिक़ यह राउंड 360 ONE Asset का EV क्षेत्र में पहला निवेश है, और Hitachi Ventures का भारत के एनर्जी सेक्टर में पहला।
कंपनी ने कहा है कि नई पूँजी का इस्तेमाल नए शहरों में विस्तार, अतिरिक्त कमर्शियल वाहन श्रेणियों में प्रवेश और रिसर्च व डेवलपमेंट में निवेश के लिए होगा।
तकनीक: 15 मिनट और 3,000 साइकिल
Exponent की प्रोप्रायटरी एनर्जी स्टैक — जिसमें बैटरी पैक, चार्जिंग कनेक्टर और सॉफ़्टवेयर शामिल हैं — संगत कमर्शियल EV को क़रीब 15 मिनट में फ़ुल चार्ज करने में सक्षम है। कंपनी इसके साथ 3,000 चार्ज-साइकिल की बैटरी-लाइफ़ वारंटी देती है, वह भी महँगे विशेष सेल के बजाय स्टैंडर्ड लिथियम-आयन सेल पर। यही टिकाऊपन और तेज़ चार्जिंग का मेल फ़्लीट अर्थशास्त्र को बदलता है, क्योंकि वाहन का डाउनटाइम घटता है।
EVreporter के अनुसार Exponent का मॉडल चार्जिंग को एक “एनर्जी-as-a-service” परत की तरह पेश करता है, जिसमें वाहन निर्माता उसके बैटरी-और-चार्जर स्टैक को अपनी गाड़ियों में एकीकृत करते हैं।
Background: कहाँ से यहाँ तक
2020 में स्थापना के बाद Exponent ने शुरुआती वर्षों में तकनीक और विश्वसनीयता साबित करने पर ध्यान दिया। ताज़ा ₹200 करोड़ के साथ कंपनी की कुल जुटाई गई पूँजी $65.7 मिलियन हो गई है, जो दिखाता है कि निवेशकों का भरोसा इसके एनर्जी-स्टैक मॉडल पर लगातार बना हुआ है। ऑटोकार प्रोफ़ेशनल और आउटलुक बिज़नेस की रिपोर्टों के अनुसार कंपनी का ज़ोर अब “प्रूफ़-ऑफ़-टेक्नोलॉजी” से हटकर “स्केल” पर है — यानी ज़्यादा शहर, ज़्यादा वाहन और ज़्यादा OEM साझेदारियाँ।
भारत में फ़ास्ट-चार्जिंग को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, पर Exponent का दावा है कि स्टैंडर्ड सेल पर 15-मिनट चार्जिंग और 3,000-साइकिल वारंटी का संयोजन इसे अलग खड़ा करता है। कंपनी के मुताबिक़ यही किफ़ायतीपन कमर्शियल फ़्लीट के लिए कुल स्वामित्व लागत (TCO) को घटाता है।
संस्थापक क्या कहते हैं
Exponent की स्थापना 2020 में Arun Vinayak और Sanjay Byalal ने की थी। विनायक इससे पहले इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर कंपनी Ather Energy में चीफ़ प्रोडक्ट ऑफ़िसर रह चुके हैं।
“शुरुआती चार-पाँच साल तकनीक और प्रोडक्ट विकसित करने व विश्वसनीयता साबित करने में लगे; अब लक्ष्य इसे भारत भर में ज़्यादा से ज़्यादा वाहनों तक पहुँचाना है।” — Arun Vinayak, सह-संस्थापक व CEO, Exponent Energy
विनायक के अनुसार कंपनी अब विकास के नए चरण में दाख़िल हो रही है। Arun Vinayak ने कहा, “हमारा फ़ोकस बेंगलुरु और दिल्ली से आगे नेटवर्क बढ़ाने और कमर्शियल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर है।” यानी अगला दाँव सिर्फ़ तकनीक नहीं, बल्कि ज़मीनी पैमाने पर है।
भारतीय एंगल और उद्योग प्रतिक्रिया
भारत का कमर्शियल EV बाज़ार तेज़ी से बढ़ रहा है, पर लंबी चार्जिंग अवधि और बैटरी की उम्र को लेकर चिंताएँ फ़्लीट अपनाने में बाधा रही हैं। उद्योग पर्यवेक्षकों के अनुसार 15-मिनट चार्जिंग और लंबी बैटरी-वारंटी का मेल लास्ट-माइल डिलीवरी और इंट्रा-सिटी लॉजिस्टिक्स जैसे हाई-यूटिलाइज़ेशन सेगमेंट में निर्णायक हो सकता है। 360 ONE और Hitachi जैसे निवेशकों का पहली बार इस क्षेत्र में उतरना दिखाता है कि कमर्शियल EV इन्फ्रास्ट्रक्चर अब बड़े संस्थागत पूँजी के रडार पर है। भारत सरकार की EV-प्रोत्साहन नीतियों और शहरी लॉजिस्टिक्स के तेज़ इलेक्ट्रिफ़िकेशन के बीच, चार्जिंग-डाउनटाइम घटाने वाली तकनीक को नीतिगत और बाज़ार, दोनों स्तरों पर समर्थन मिल रहा है। TDK और Hitachi जैसे वैश्विक औद्योगिक निवेशकों की मौजूदगी से Exponent को कंपोनेंट-सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय विस्तार में रणनीतिक बढ़त भी मिल सकती है।
आगे क्या?
अगले 30-90 दिनों में तीन चीज़ों पर नज़र रहेगी: पहला, Exponent किन नए शहरों में अपना चार्जिंग नेटवर्क उतारती है; दूसरा, कौन-सी नई वाहन श्रेणियाँ — जैसे तिपहिया, हल्के कमर्शियल वाहन या बसें — इसकी एनर्जी स्टैक अपनाती हैं; और तीसरा, क्या कोई बड़ा OEM साझेदारी की घोषणा करता है। इन कदमों से तय होगा कि तेज़-चार्जिंग तकनीक भारत के कमर्शियल EV अपनाने की रफ़्तार को कितना बढ़ाती है।
स्रोत: Entrackr, Business Standard, YourStory, Autocar Professional, Outlook Business, EVreporter (10 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।





