नई दिल्ली, 13 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): कंज़्यूमर AI स्टार्टअप Equal AI ने $30 मिलियन (क़रीब ₹250 करोड़) की Series B फंडिंग जुटाई है, जिसे Prosus Ventures और Tomales Bay Capital ने मिलकर लीड किया। कंपनी का AI कॉल असिस्टेंट लॉन्च के कुछ ही महीनों में 10 लाख मंथली एक्टिव यूज़र्स (MAU) पार कर चुका है।
भारत में हर स्मार्टफोन यूज़र रोज़ स्पैम, डिलीवरी और लोन-इंश्योरेंस कॉल्स से जूझता है। Truecaller और सरकार का CNAP (Calling Name Presentation) सिस्टम कॉलर का नाम तो बता देते हैं, लेकिन यह नहीं कि कॉल आख़िर किस काम के लिए है। Equal AI इसी गैप पर खेल रही है — और यह राउंड बताता है कि ग्लोबल निवेशक भारत के कंज़्यूमर AI मार्केट को कितनी गंभीरता से लेने लगे हैं।
ऐप करता क्या है: कॉल आपकी जगह AI उठाता है
TechCrunch की 12 जून की रिपोर्ट के अनुसार यह ऐप (फ़िलहाल सिर्फ़ Android पर) अनजान नंबरों की कॉल ख़ुद रिसीव करता है, कॉलर से वजह पूछता है और स्क्रीन पर दिखाता है कि सामने वाला क्यों कॉल कर रहा है। डायलर पर “डिलीवरी दरवाज़े के पास छोड़ दें” या “पड़ोसी को दे दें” जैसे क्विक-रिप्लाई विकल्प मिलते हैं, जिन्हें AI कॉलर को पढ़कर सुना देता है; यूज़र अपना कस्टम मैसेज भी टाइप कर सकता है। हर कॉल की रिकॉर्डिंग, ट्रांसक्रिप्ट और समरी ऐप में सेव रहती है।
कंपनी के मुताबिक़ ऐप के 10 लाख से ज़्यादा MAU और 3 लाख से ज़्यादा डेली एक्टिव यूज़र्स हैं। भारतीय यूज़र्स अक्सर एक ही वाक्य में दो-तीन भाषाएं मिलाते हैं — इसी code-mixing को ध्यान में रखकर कंपनी ने 10 से ज़्यादा भाषाओं का सपोर्ट बनाया है, जिसमें स्पीच रिकग्निशन (ASR) और स्पीच जेनरेशन मॉडलों के ऊपर उसकी अपनी orchestration layer काम करती है।
फंडिंग की डिटेल: तीन हिस्सों में बंटा राउंड
राउंड में Think Investments और Valiant Fund ने भी हिस्सा लिया। इंडिविजुअल निवेशकों की लिस्ट दिलचस्प है — PhonePe के फाउंडर Sameer Nigam, Airtel Family Office के Zubin Bharti Mittal, Skyflow के को-फाउंडर Anshu Sharma, Meta India की VP Sandhya Devanathan और CtrlS Datacenters के चेयरमैन Sridhar Pinnapureddy। नए राउंड के साथ कंपनी की कुल फंडिंग $42 मिलियन से ऊपर पहुंच गई है; Prosus और Tomales Bay ने ही नवंबर 2024 का $10 मिलियन का Series A भी लीड किया था।
TechCrunch के अनुसार राउंड तीन tranches में स्ट्रक्चर्ड है, जिसमें तय टार्गेट पूरे होने पर हर हिस्से की वैल्यूएशन अलग होती है — स्टार्टअप जगत में यह तरीक़ा अभी नया लेकिन बढ़ता हुआ है। कंपनी ने अपनी वैल्यूएशन सार्वजनिक नहीं की।
फाउंडर की सोच: ‘कार इंश्योरेंस लो तो हफ्ते में 20 कॉल’
“हम हमेशा कस्टमर-फेसिंग कंपनी बनना चाहते थे। पहला use case कॉल असिस्टेंट इसलिए चुना क्योंकि यूज़र्स को financial services या job openings के ढेरों कॉल आते हैं।” — Keshav Reddy, Founder, Equal AI (TechCrunch से)
Keshav Reddy ने 2022 में कंपनी शुरू की थी; वे GVK ग्रुप वाले परिवार से आते हैं और पहले वेंचर निवेशक के तौर पर Cred और Upstox जैसी कंपनियों में पैसा लगा चुके हैं। Equal ने शुरुआत फाइनेंशियल सर्विसेज़ के लिए डेटा-शेयरिंग और KYC verification से की थी; कॉल असिस्टेंट ऐप अक्टूबर 2025 में लॉन्च हुआ।
“अगर कोई ऐप कुछ use cases में अच्छा कर दे, तो वह अपने niche में तेज़ी से पॉपुलर होकर user stickiness बना सकता है और बाद में दूसरे एरिया में फैल सकता है।” — Keshav Reddy, Founder, Equal AI
कॉम्पिटिशन: Truecaller से Google तक सबकी नज़र
मुक़ाबला आसान नहीं है। Google और Apple दोनों के अपने कॉल-स्क्रीनिंग प्रोडक्ट हैं, भारत में घर-घर पहुंच चुका Truecaller अपने AI असिस्टेंट फीचर बना रहा है, और अमेरिका में a16z-backed Cloaked भी इसी स्पेस में उतर चुकी है। Prosus Ventures के ग्लोबल co-head Thiago Viana के अनुसार लोकल कॉन्टेक्स्ट की गहरी समझ ही Equal की असली बढ़त है।
Prosus लोकल मार्केट वाले AI असिस्टेंट्स पर लगातार दांव लगा रही है — उसके पोर्टफोलियो में स्पेन की Luzia और लैटिन अमेरिका की Zapia हैं। दोनों WhatsApp के थर्ड-पार्टी AI बॉट बैन की चपेट में आ चुकी हैं — इसी से सबक़ लेकर Equal ने किसी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर निर्भर रहने के बजाय कॉल और अपने ऐप के इर्द-गिर्द प्रोडक्ट बनाया है। भारत के AI इकोसिस्टम में फंडिंग की यह होड़ ग्लोबल ट्रेंड का हिस्सा है — OpenAI की $852 अरब वैल्यूएशन वाली IPO फाइलिंग इसी हफ्ते की सुर्ख़ी रही है।
आगे क्या?
अगले 30-90 दिनों में तीन चीज़ें देखने लायक होंगी: पहली, known numbers की स्क्रीनिंग का रोलआउट — अभी ऐप सिर्फ़ अनजान कॉल उठाता है; दूसरी, AI से proactive actions — जैसे (यूज़र की सहमति से) डिलीवरी वाले को पता टेक्स्ट करना या अपॉइंटमेंट बुक करने के लिए outbound कॉल; और तीसरी, iOS वर्शन और paid subscription tier की लॉन्चिंग, जिन पर कंपनी काम कर रही है। Android से आगे बढ़े बिना भारत के प्रीमियम यूज़र सेगमेंट तक पहुंच अधूरी रहेगी — और वहीं Apple का अपना कॉल स्क्रीनिंग इंतज़ार कर रहा है।
स्रोत: TechCrunch, Entrackr, Analytics Insight, Mezha, Let’s Data Science (12 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।





