बेंगलुरु, 16 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): भारतीय AI स्टार्टअप Sarvam ने $234 मिलियन (लगभग ₹2,000 करोड़) जुटाकर $1.5 बिलियन का वैल्यूएशन हासिल कर लिया है और देश का नया AI यूनिकॉर्न बन गया है। राउंड की अगुवाई IT सेवा कंपनी HCLTech ने की, जिसने अकेले $150 मिलियन का निवेश किया।
यह सौदा ऐसे वक़्त आया है जब सरकारें और कंपनियाँ अपने डेटा और कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ख़ुद का नियंत्रण चाहती हैं। भारत AI का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार होने के बावजूद अब तक गिने-चुने ही फ़ाउंडेशन मॉडल खड़े कर पाया है — इसी अंतर को Sarvam भरने की कोशिश कर रहा है।
राउंड में क्या-क्या है
TechCrunch के मुताबिक़ यह Sarvam की Series B का पहला क्लोज़ है और कंपनी कुल $300 मिलियन जुटाने का लक्ष्य रखती है। HCLTech के अलावा Bessemer Venture Partners ने भी हिस्सा लिया, जबकि मौजूदा निवेशक Khosla Ventures और Peak XV Partners बने रहे। यह निवेश Sarvam के उन $41 मिलियन के बाद आया है जो उसने 2023 में सीड और Series A में जुटाए थे।
कंपनी इस साल की शुरुआत में 30-बिलियन और 105-बिलियन पैरामीटर के ओपन-सोर्स मॉडल पेश कर चुकी है। Sarvam के मॉडल ख़ासतौर पर भारतीय भाषाओं और इस्तेमाल के लिए बनाए गए हैं और बैंकिंग, बीमा, सरकारी सेवाओं तथा रक्षा क्षेत्र में तैनात किए जा रहे हैं।
कौन क्या बोला
Sarvam के सह-संस्थापक Vivek Raghavan ने बयान में कहा,
“हमारी महत्वाकांक्षा इस तकनीक को भारत में व्यापक रूप से फैलाने की है, ताकि नागरिकों, छोटे कारोबारों, एंटरप्राइज़ और राज्य व केंद्र सरकारों के लिए हर क्षेत्र में बड़ा मूल्य पैदा हो।” — Vivek Raghavan, सह-संस्थापक, Sarvam
निवेश की वजह बताते हुए HCLTech के CEO और MD C. Vijayakumar ने कहा कि यह क़दम एक “भरोसेमंद और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी AI इकोसिस्टम” बनाने की कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। योजना यह है कि Sarvam के मॉडल HCLTech के एंटरप्राइज़ रिश्तों, इंजीनियरिंग वर्कफ़ोर्स और सॉफ्टवेयर एसेट्स के साथ जोड़कर कारोबारों और सरकारों के लिए AI प्रोडक्ट बनाए जाएँ।
पैमाना: रोज़ाना करोड़ों इंटरैक्शन
Sarvam के मुताबिक़ उसका कन्वर्सेशनल AI प्लेटफ़ॉर्म रोज़ 20 लाख (2 मिलियन) से ज़्यादा इंटरैक्शन संभालता है, जबकि इन्फ़रेंस प्लेटफ़ॉर्म रोज़ाना क़रीब 1 करोड़ (10 मिलियन) API कॉल प्रोसेस करता है। इसके स्पीच मॉडल हर महीने 5 लाख घंटे से अधिक ऑडियो ट्रांसक्राइब करते हैं और डॉक्यूमेंट AI सिस्टम 3.5 करोड़ पन्नों को डिजिटाइज़ कर रहे हैं।
कंपनी का दावा है कि उसके मल्टीलिंगुअल वॉइस एजेंट्स ने भारत के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के लिए 1.7 करोड़ किसानों से डेटा जुटाया, जबकि एक बड़े बीमाकर्ता के नेशनवाइड वॉइस कैंपेन ने 4.5 करोड़ पॉलिसीधारकों के रिन्युअल में मदद की। एक बड़ी फिनटेक कंपनी इसके एजेंटिक AI प्लेटफ़ॉर्म से 3.5 लाख से बड़ी सेल्स टीम को सपोर्ट कर रही है।
फुल-स्टैक दांव और फंडिंग का माहौल
Sarvam उन गिने-चुने स्टार्टअप्स में है जो मॉडल डेवलपमेंट, इन्फ़रेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और एंटरप्राइज़ ऐप्लिकेशन — तीनों परतों पर एक साथ “फुल-स्टैक” AI कारोबार खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। यह दांव ऐसे समय आया है जब रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भारतीय स्टार्टअप्स ने 2026 में वैश्विक AI फंडिंग में बड़ी हिस्सेदारी खींची है, और सरकार की IndiaAI Mission ने ₹10,371 करोड़ (क़रीब $1.25 बिलियन) के शुरुआती निवेश से घरेलू कंप्यूट इन्फ्रास्ट्रक्चर को रफ़्तार दी है।
विश्लेषकों का कहना है कि असली परीक्षा अब कमर्शियलाइज़ेशन की है — ओपन-सोर्स मॉडल और सरकारी प्रोजेक्ट्स से पहचान बनाना अलग बात है, और उससे टिकाऊ रेवेन्यू निकालना अलग। HCLTech के बड़े इंजीनियरिंग वर्कफ़ोर्स और वैश्विक क्लाइंट नेटवर्क के साथ जुड़ाव यहीं Sarvam के लिए निर्णायक हो सकता है।
मुख्य तथ्य
राउंड: $234 मिलियन (Series B पहला क्लोज़) • वैल्यूएशन: $1.5 बिलियन • लीड निवेशक: HCLTech ($150 मिलियन) • अन्य: Bessemer, Khosla Ventures, Peak XV • लक्ष्य: कुल $300 मिलियन • संस्थापक: Vivek Raghavan, Pratyush Kumar (पूर्व AI4Bharat, IIT मद्रास)।
सॉवरेन AI की बहस और भारतीय एंगल
यह फंडिंग ऐसे माहौल में आई है जब “सॉवरेन AI” यानी अपने देश का AI इन्फ्रास्ट्रक्चर रखने की बहस तेज़ है। पिछले हफ़्ते Anthropic ने अपने नए मॉडल विदेशी नागरिकों के लिए बंद कर दिए थे, जिससे यह सवाल फिर उठा कि अत्याधुनिक AI तक पहुँच चंद विदेशी प्रदाताओं तक सीमित है। OpenAI और Anthropic, दोनों भारत को अमेरिका के बाद अपना दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार बता चुके हैं।
Sarvam के संस्थापक Vivek Raghavan और Pratyush Kumar पहले IIT मद्रास की भारतीय-भाषा AI पहल AI4Bharat से जुड़े थे, जिसे टेक दिग्गज Nandan Nilekani का समर्थन रहा है। उद्योग पर्यवेक्षकों के मुताबिक़ HCLTech जैसे गहरी जेब वाले रणनीतिक साझेदार का जुड़ना Sarvam को कमर्शियलाइज़ेशन में बढ़त देगा, हालाँकि ऊँची कंप्यूटिंग लागत और पूँजी की क़िल्लत भारतीय मॉडल-निर्माताओं के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
आगे क्या?
Sarvam का कहना है कि नई पूँजी से वह अगली पीढ़ी के मॉडल पर रिसर्च करेगा, जिनका फ़ोकस एजेंटिक, कोडिंग और साइबरसिक्योरिटी पर होगा, साथ ही कंप्यूटिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर तक पहुँच बढ़ाई जाएगी। अगले 30-90 दिनों में तीन चीज़ें देखने लायक़ होंगी — Series B का बाक़ी हिस्सा क्लोज़ होना, HCLTech के साथ पहले संयुक्त एंटरप्राइज़ प्रोडक्ट का रोलआउट, और नए मॉडलों की रिलीज़ टाइमलाइन। पाठक इस बीच हमारी NVIDIA RTX Spark AI चिप रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं।
स्रोत: TechCrunch, Business Today, Business Standard, Entrackr, Swarajya (15-16 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।





