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Zetwerk FY26: रेवेन्यू 24% बढ़कर ₹15,900 करोड़

On: June 16, 2026 6:24 AM
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Zetwerk FY26 रेवेन्यू मैन्युफैक्चरिंग - IT Samachar
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बेंगलुरु, 16 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): मैन्युफैक्चरिंग स्टार्टअप Zetwerk ने FY26 में ₹15,900 करोड़ का अनुमानित परिचालन रेवेन्यू दर्ज किया है, जो FY25 के ₹12,800 करोड़ से 24% ज़्यादा है। डॉलर के लिहाज़ से कंपनी इस साल $2 बिलियन से अधिक रेवेन्यू के साथ बंद होने की उम्मीद कर रही है। यह आँकड़ा रेटिंग एजेंसी CRISIL Ratings की हालिया रेटिंग रिपोर्ट से सामने आया।

इस वापसी की सबसे बड़ी वजह एक नया इंजन है — डेटा सेंटर और एनर्जी इन्फ़्रास्ट्रक्चर की माँग। जैसे-जैसे भारत और दुनिया में AI के लिए डेटा सेंटर बन रहे हैं, उनसे जुड़े बिजली उपकरण और मॉड्यूल बनाने वाली कंपनियों को सीधा फ़ायदा मिल रहा है। Zetwerk का यह आँकड़ा भारतीय कॉन्ट्रैक्ट-मैन्युफैक्चरिंग के लिए AI बूम के “पिक-एंड-शॉवल” अवसर का जीता-जागता उदाहरण है।

आँकड़ों में क्या है

Inc42 की रिपोर्ट के अनुसार, ₹15,900 करोड़ का रेवेन्यू अनुमान CRISIL की रेटिंग rationale पर आधारित है। ग्रोथ को मज़बूती मार्च 2026 तक ₹12,000 करोड़ से अधिक के ऑर्डर बुक से मिल रही है, जिसे अगले 12–18 महीनों में पूरा किया जाना है। 2018 में स्थापित यह कंपनी एक फुल-स्टैक मैन्युफैक्चरिंग प्लेटफ़ॉर्म चलाती है, जो industrials, electronics, renewable energy और consumer products जैसे क्षेत्रों को सेवाएँ देती है।

डेटा सेंटर बूम का असर

कंपनी के सह-संस्थापक एवं CEO Amrit Acharya के अनुसार, डेटा सेंटर विस्तार से जुड़ी माँग एक बड़ा tailwind बनकर उभरी है — भले ही Zetwerk सीधे Google या OpenAI जैसी कंपनियों को नहीं बेचता।

“डेटा सेंटर विस्तार से जुड़ी माँग हमारे लिए एक बड़ा tailwind बन गई है।” — Amrit Acharya, सह-संस्थापक एवं CEO, Zetwerk

Acharya के मुताबिक़ एनर्जी-संबंधी मैन्युफैक्चरिंग अब कंपनी के रेवेन्यू का क़रीब 40% है और यह सालाना लगभग 100% की दर से बढ़ रहा है। यानी कंपनी की growth का बड़ा हिस्सा अब उसी इन्फ़्रास्ट्रक्चर लहर से आ रहा है जो AI को ज़मीन पर खड़ा कर रही है।

Zetwerk का सफ़र: गैराज से अरबों डॉलर तक

Zetwerk की कहानी भारतीय B2B स्टार्टअप की महत्वाकांक्षा का प्रतीक है। 2018 में Amrit Acharya, Srinath Ramakkrushnan, Vishal Chaudhary और Rahul Sharma ने इसकी नींव रखी थी। कंपनी का मॉडल सीधा है — यह ख़ुद कारख़ाना नहीं चलाती, बल्कि हज़ारों छोटे-मँझोले निर्माताओं और बड़े ग्राहकों के बीच एक डिजिटल पुल बनकर ऑर्डर, क्वालिटी और सप्लाई-चेन का प्रबंधन करती है। इसी एसेट-लाइट प्लेटफ़ॉर्म रणनीति ने इसे कुछ ही वर्षों में यूनिकॉर्न क्लब तक पहुँचाया।

शुरुआती वर्षों में इंडस्ट्रियल पार्ट्स और कंस्ट्रक्शन से शुरू हुई कंपनी ने धीरे-धीरे electronics, defence, aerospace और renewable energy तक विस्तार किया। अब डेटा सेंटर और एनर्जी सेगमेंट इसके सबसे तेज़ बढ़ते वर्टिकल बन गए हैं, जो इसके रेवेन्यू-मिक्स को ऊँचे-मार्जिन वाले क्षेत्रों की ओर मोड़ रहे हैं।

मुनाफ़े का दबाव और CRISIL की चेतावनी

रेवेन्यू भले लौटा हो, पर मुनाफ़ा अब भी दबाव में है। CRISIL का अनुमान है कि FY26 में Zetwerk का operating margin क़रीब 2.6% रहा — पिछले साल से बेहतर, लेकिन फिर भी पतला। यह कॉन्ट्रैक्ट-मैन्युफैक्चरिंग बिज़नेस मॉडल की सच्चाई है, जहाँ वॉल्यूम बड़ा होता है पर मार्जिन कम।

“नकारात्मक आउटलुक civil EPC कारोबार से बाहर निकलने से जुड़े जोखिमों को दर्शाता है।” — CRISIL Ratings

एजेंसी ने आगाह किया कि civil EPC सेगमेंट से निकलने के दौरान किसी बड़े प्रावधान या घाटे की स्थिति में समूह की credit profile प्रभावित हो सकती है। CRISIL ने अधिग्रहण (acquisitions) को कंपनी के लिए आगे एक अहम growth lever भी बताया।

IPO की तैयारी और भारतीय एंगल

Zetwerk सार्वजनिक होने की राह पर है। कंपनी ने confidential रूट से लगभग $450 मिलियन (≈₹4,200 करोड़) के IPO के लिए draft पेपर दाखिल किए हैं, जिसमें क़रीब $300 मिलियन का fresh issue और $150 मिलियन का OFS शामिल है। लिस्टिंग से पहले कंपनी $50–60 मिलियन का pre-IPO राउंड भी जुटाने पर विचार कर रही है। इश्यू का प्रबंधन Mahindra Capital, JM Financial, Avendus Capital और HSBC, Morgan Stanley व Goldman Sachs की भारतीय इकाइयाँ कर रही हैं। यह 2026 की उसी IPO लहर का हिस्सा है जिसमें Databricks जैसी कंपनियाँ भी सार्वजनिक होने की राह पर हैं।

भारतीय मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए यह कहानी मायने रखती है। यह दिखाती है कि “मेक इन इंडिया” और AI-इन्फ़्रास्ट्रक्चर का संगम कैसे घरेलू कंपनियों के लिए नए राजस्व-स्रोत खोल रहा है — और कैसे एक एसेट-लाइट प्लेटफ़ॉर्म मॉडल अरबों डॉलर के पैमाने तक पहुँच सकता है।

मुख्य तथ्य

FY26 रेवेन्यू: ₹15,900 करोड़ (+24% YoY); $2 बिलियन+ का लक्ष्य; ऑर्डर बुक: ₹12,000 करोड़+ (मार्च 2026); operating margin: ~2.6% (CRISIL अनुमान); IPO: ~$450 मिलियन (confidential); एनर्जी सेगमेंट: ~40% रेवेन्यू।

आगे क्या?

अगले 30–90 दिनों में तीन बातों पर नज़र रहेगी। पहला, pre-IPO राउंड और updated DRHP के सार्वजनिक होने का समय। दूसरा, क्या एनर्जी/डेटा-सेंटर सेगमेंट की 100% सालाना ग्रोथ बरक़रार रहती है, क्योंकि यही वैल्यूएशन की कुंजी है। तीसरा, civil EPC से निकलने की प्रक्रिया और उससे मार्जिन पर पड़ने वाला असर, जिस पर CRISIL की नज़र है।

स्रोत: Inc42, Convergence-Now, Whalesbook, Business Standard, CRISIL Ratings rationale (15 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग)।

Ganesh Thik

गणेश ठीक IT Samachar के संस्थापक एवं मुख्य लेखक हैं। IT Samachar के माध्यम से वे IT इंडस्ट्री से जुड़ी ताज़ा खबरें, कंपनी अपडेट्स, layoffs, AI और मशीन लर्निंग, साइबर सिक्योरिटी, स्टार्टअप्स और टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स पर विश्वसनीय जानकारी हिंदी में उपलब्ध कराते हैं।

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