वॉशिंगटन, 7 जून 2026 (IT Samachar डेस्क): भारतीय मूल के टेक एग्जीक्यूटिव और वेंचर कैपिटलिस्ट Sriram Krishnan जून के अंत में White House के वरिष्ठ AI नीति सलाहकार पद से हट रहे हैं। 6 जून को X पर एक पोस्ट में उन्होंने अपना 18 महीने का कार्यकाल पूरा कर इस्तीफ़े की पुष्टि की।
यह बदलाव ऐसे समय आया है जब अमेरिका में AI को लेकर regulation बनाम growth की बहस अपने चरम पर है। White House का AI सलाहकार पद सीधे प्रशासन की data center, चिप निर्यात और मॉडल ओवरसाइट नीति को दिशा देता है — इसलिए इस कुर्सी का खाली होना सिर्फ़ अमेरिका नहीं, बल्कि दुनियाभर के AI ecosystem और भारत जैसे बड़े tech-talent स्रोत देश के लिए भी मायने रखता है।
क्या हुआ: 18 महीने बाद विदाई
Krishnan ने दिसंबर 2024 में Trump प्रशासन के वरिष्ठ AI नीति सलाहकार का पद संभाला था। TechCrunch की रिपोर्ट (लेखक Anthony Ha, 6 जून) के अनुसार वे महीने के अंत तक पद छोड़ देंगे। Washington Post के मुताबिक़ वे एक स्वतंत्र संस्था (institution) शुरू करने जा रहे हैं, जो आगे भी अमेरिकी AI नीति को आकार देने में भूमिका निभाएगी। उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि जुलाई 2025 में आया AI Action Plan माना जाता है, जिसने regulation के बजाय data center निर्माण और घरेलू AI क्षमता को प्राथमिकता दी। इसके बाद AI ओवरसाइट और राज्य-स्तरीय नियमों को लेकर कई executive order आए, जिनमें से एक उद्योग की आपत्तियों के बाद नरम और सीमित किया गया।
Krishnan ने क्या कहा
अपनी विदाई पोस्ट में Krishnan ने कार्यकाल को बड़ा सम्मान बताया।
“It is hard to express how big a privilege it has been to serve the American people.” — Sriram Krishnan, पूर्व वरिष्ठ AI नीति सलाहकार, White House
उन्होंने अपने सबसे क़रीबी सहयोगी रहे निवेशक David Sacks का भी ज़िक्र किया, जो इस साल की शुरुआत में AI एवं crypto czar पद से हटकर President’s Council of Advisors on Science and Technology के सह-अध्यक्ष बने।
“Sacks’ continuing advocacy for America winning on AI has been and continues to be crucial.” — Sriram Krishnan
Krishnan ने आगे कहा कि वे अब institutions बनाने पर ध्यान देंगे, जो ऊर्जा, data center और आम लोगों तक AI के लाभ पहुँचाने जैसी चुनौतियों से निपटेंगी। उनके शब्दों में, अमेरिका और उसके सहयोगियों के सामने ये कई कठिन मुद्दे हैं जिन्हें मिलकर सुलझाना होगा।
कौन हैं Sriram Krishnan
White House पहुँचने से पहले Krishnan सिलिकॉन वैली का जाना-पहचाना नाम रहे हैं। उन्होंने Microsoft, Twitter, Yahoo, Facebook और Snap में product टीमों का नेतृत्व किया, और सबसे हाल में वेंचर कैपिटल फ़र्म Andreessen Horowitz (a16z) में partner थे। भारतीय मूल के Krishnan उन कई टेक उद्यमियों में से एक थे जिन्होंने दूसरे Trump प्रशासन में सरकारी भूमिकाएँ संभालीं। उनका जाना ऐसे महीने में हो रहा है जब टेक नीति में बड़े फ़ैसले चल रहे हैं — हाल ही में यह संकेत भी मिला कि सरकार बड़ी AI कंपनियों में इक्विटी हिस्सेदारी लेने पर विचार कर सकती है, जो AI और सार्वजनिक नीति के रिश्ते में एक असामान्य मोड़ होगा।
मुख्य तथ्य
पद: White House वरिष्ठ AI नीति सलाहकार। कार्यकाल: दिसंबर 2024 से जून 2026 (18 महीने)। पिछली भूमिका: a16z partner। प्रमुख उपलब्धि: AI Action Plan (जुलाई 2025)। अगला क़दम: स्वतंत्र नीति संस्था।
भारत के लिए मायने
Krishnan का भारतीय मूल का होना इस ख़बर को भारत के लिए ख़ास बनाता है। अमेरिका की AI नीति में किसी भी बदलाव का असर उन हज़ारों भारतीय AI इंजीनियरों और शोधकर्ताओं पर पड़ता है जो US में काम कर रहे हैं या वहाँ जाना चाहते हैं। data center-केंद्रित नीति का मतलब है GPU और कंप्यूट की और माँग, जिसका सीधा फ़ायदा भारतीय IT सेवा कंपनियों और global capability centres (GCC) को मिल सकता है। साथ ही, जब अमेरिका AI talent और H-1B नीतियों पर सख़्ती की ओर बढ़ रहा है, तब वॉशिंगटन में एक भारतीय-मूल आवाज़ का हटना नई दिल्ली के नीति-निर्माताओं के लिए भी ध्यान देने योग्य है।
आगे क्या?
अगले 30-90 दिनों में तीन चीज़ें देखने लायक़ हैं: पहला, प्रशासन इस पद पर किसे नियुक्त करता है और क्या data center-फ़र्स्ट रुख़ बरक़रार रहता है; दूसरा, Krishnan की नई संस्था का स्वरूप और फंडिंग; और तीसरा, AI कंपनियों में संभावित सरकारी इक्विटी हिस्सेदारी का प्रस्ताव आगे बढ़ता है या नहीं। इन फ़ैसलों की गूँज भारत की अपनी IndiaAI रणनीति और घरेलू कंप्यूट योजनाओं तक पहुँचेगी।
पृष्ठभूमि: टेक से नीति तक का सफ़र
AI Action Plan के तहत अमेरिका ने ऊर्जा, चिप और कंप्यूट क्षमता को राष्ट्रीय प्राथमिकता का दर्जा दिया, और कई बड़े data center सौदों को रफ़्तार मिली। इसी दौर में सरकार और बड़ी AI कंपनियों के बीच का रिश्ता पहले से कहीं गहरा हुआ — कंप्यूट की भारी माँग, बिजली की उपलब्धता और राज्य बनाम केंद्र नियमन का टकराव लगातार सुर्ख़ियों में रहा। Krishnan इन्हीं नीतिगत मोर्चों पर प्रशासन और सिलिकॉन वैली के बीच एक पुल की तरह काम करते रहे, जिससे उनका हटना उद्योग के लिए ध्यान खींचने वाली घटना बन गया है।
स्रोत: TechCrunch, Washington Post, Bloomberg, CNBC, Honolulu Star-Advertiser (Reuters) — 6-7 जून 2026 तक की रिपोर्टिंग।





